फरवरी माह से राज्य में शुरू होने जा रहे खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत तैयारियां पूरी हो गई हैं। जिला में एक लाख 40 हजार परिवारों को नई योजना से राशन मुहैया करवाया जा रहा है।
पुराने रिकार्ड के अनुसार जहां विभाग 2001 जनगणना के अनुसार उपभोक्ताओं को राशन मुहैया करवा पा रहा था, वहीं नए नियम में वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर उपभोक्ताओं को शामिल किया जा रहा है।
विभागीय अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार कंप्यूटर पर उपभोक्ताओं के नाम पंच करने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब वेरिफिकेशन का काम एक सप्ताह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
वहीं विभाग ने नए नियम के अनुसार बडे़ व्यवसायियों और गजटेड अधिकारियों को के लिए आय सीमा निर्धारित की गई है। ऐसे 16 हजार लोगों को सरकारी राशन का लाभ नहीं मिलेगा।
यही नहीं विभाग ने राशन आवंटन के लिए प्राथमिकता और गैर प्राथमिकता का स्लैब तैयार किया है, जिसमें प्राथमिकता के आधार पर अब तक बीपीएल, एएवाई का राशन लेने वालों को शामिल किया गया है।
इसके साथ ही समाज के जरूरतमंद और गरीब लोगों की भी शिनाख्त की जा रही है जिन्हें प्राथमिकता की स्लैब में शामिल किया जाएगा।
गैर प्राथमिकता स्लैब में मध्यम वर्ग के लोगों को शामिल किया गया है, जो अब तक आठ रुपये के हिसाब से सरकारी आटा और दस रुपये के हिसाब से सरकारी चावल हासिल कर रहे थे। जिला की छह लाख 15 हजार 716 की आबादी में से सोलह हजार लोगों को छोड़कर बाकी सभी को राशन देने की तैयारी है।
ग्रामीण इलाकों से 64 फीसदी और शहरी इलाके से 46 फीसदी ऐसे लोगों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत लाने की तैयारी की जा रही है, जो गरीब और जरूरतमंद है। जिन्हें अब तक न तो बीपीएल का लाभ मिल रहा था और न एएवाई स्कीम का।
ऐसे में जिला के तीन फीसदी और ऐसे लोग प्राथमिकता स्लैब का लाभ ले सकेंगे। ऐसे में जिला के छह लाख के लगभग लोगों को सरकारी राशन वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार हासिल होगा। सीएपीडी सहायक आयुक्त केवल कृष्ण ने बताया कि एपीएल, बीपीएल और एएवाई उपभोक्ताओं को खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशन मुहैया करवाया जा रहा है।
फरवरी माह के पहले सप्ताह में महामहिम राज्यपाल द्वारा खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उद्घाटन प्रस्तावित है। ऐसे में फरवरी माह में जिला की छह लाख आबादी को नई योजना के तहत लाभान्वित किया जाएगा।