कठुआ। जिले में मौसम का रुख लगातार शुष्क बना हुआ है। 92 दिन से अधिक समय तक बारिश नहीं होने से कंडी और पहाड़ी इलाकों में फसल की पैदावार को लेकर संकट पैदा हो गया है।
अक्तूबर और नवंबर माह बिना बारिश के गुजर गए और दिसंबर में भी 19 तारीख तक बारिश के कोई आसार नहीं हैं। इस स्थिति ने किसानों की चिंता को और बढ़ा दिया है। खेतों में नमी की कमी के कारण रबी फसल की बुवाई प्रभावित हो रही है वहीं सूखे मौसम से जुड़ी बीमारियों ने आम लोगों को भी परेशान कर रखा है।
कृषि विज्ञान केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में बारिश का आखिरी दौर आठ सितंबर को दर्ज हुआ था। सितंबर माह में दो सितंबर को 100.5 मिमी, तीन सितंबर को 70.5 मिमी और आठ सितंबर को 8.0 मिमी वर्षा दर्ज की गई थी। इसके बाद से अब तक जिले में बारिश नहीं हुई है। लगातार सूखे मौसम के चलते मिट्टी की नमी घट गई है और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई में कठिनाई आ रही है।
किसानों का कहना है कि यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो फसल उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। सिंचाई के सीमित साधनों वाले क्षेत्रों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है। वहीं मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर के मध्य तक वर्षा की संभावना नहीं है, जिससे सूखे का असर और गहरा सकता है। सूखे मौसम ने स्वास्थ्य पर भी असर डाला है। धूल और प्रदूषण के कारण श्वसन संबंधी बीमारियों में वृद्धि हुई है। अस्पतालों में खांसी, जुकाम और एलर्जी के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ के प्रमुख डॉ. विशाल महाजन ने बताया कि कंडी क्षेत्र में अब तक बुवाई नहीं हो पाई है। गेहूं, सरसों और चने जैसी प्रमुख रबी फसलें लंबित हैं। उन्होंने कहा कि किसानों ने कुछ जगहों पर ड्राई सोइंग की है, लेकिन यह तभी सुरक्षित रहेगी जब बीज का ट्रीटमेंट किया गया हो। यदि बीज ट्रीट नहीं किया गया है तो 22 से 25 दिन के भीतर बीज सड़ने का खतरा है।
डॉ. महाजन ने बताया कि जिले में पिछले 92 दिनों से ड्राई स्पेल जारी है। सितंबर के बाद से अब तक बारिश नहीं हुई है, जिससे खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि अगले दस दिनों में पहाड़ाें में हिमपात नहीं होता तो बर्फ जमने की संभावना भी नहीं रहेगी।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्रिसमस, नए साल और लोहड़ी तक भी बारिश या हिमपात नहीं हुआ तो फसलों पर गंभीर असर पड़ सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे बीज संरक्षण और नमी बचाने के उपाय अपनाएं तथा मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर ध्यान दें।