संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने तीन किलो एल्युमीनियम चोरी मामले के आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मुताबिक, चोरी एक आपराधिक मामला है। अभियोजन पक्ष को उचित संदेह से परे अपराध को साबित करना होता है। अगर कही भी संदेह सामने आता है, तो इसका लाभ अभियुक्त को दिया जाना चाहिए।
पुलिस की ओर से दायर चार्जशीट के अनुसार आरोपी राकेश कुमार निवासी शिवा नगर कठुआ को जिला पुस्तकालय की मरम्मत का काम करवा रहे ठेकेदार ने अपने बेटे की मदद से 8 अप्रैल 2022 को चोरी करते हुए रंगेहाथ पकड़ा था जो बाद में फरार हो गया। चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज का भी हवाला दिया गया। ठेकेदार की शिकायत के बाद 10 अप्रैल 2022 को थाना कठुआ में मामला दर्ज किया गया। आरोपी को 6 जनवरी 2023 को गिरफ्तार कर लिया। 12 फरवरी 2023 को कोर्ट के समक्ष चालान पेश किया गया। 28 अगस्त 2023 को आरोपी को जमानत पर रिहा कर दिया गया था।
24 दिसंबर 2024 को मामले में अंतिम सुनवाई हुई। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष ने आरोप साबित करने के लिए तीन गवाहों को पेश किया। लेकिन तीनों गवाहों के बयान आपस में मेल नहीं खाए। कोर्ट ने माना कि अगर चोरी उस दिन शाम सात बजे के करीब हुई तो शिकायतकर्ता ने शिकायत दो दिन बाद क्यों की। जबकि थाना वारदात की जगह से सिर्फ आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। शिकायतकर्ता और उसके बेटे के मुताबिक जब आरोपी को रंगेहाथ पकड़ा तो कई लोग वहां मौजूद थे। फिर उन लोगों को गवाह क्यों नहीं बनाया गया।अदालत ने बरी करने का आदेश देते हुए कहा कि जब्त की गई चोरी की संपत्ति शिकायतकर्ता के पक्ष में जारी की जाती है।