जिला के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) कठुआ में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। अब अकादमिक ब्लॉक से निकलने वाले अपशिष्ट जल को कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के माध्यम से उपचारित किया जाएगा। यह प्लांट परिसर के शौचालयों और स्नानागारों से निकलने वाले जल को शुद्ध करने में सक्षम होगा, जिसकी क्षमता लगभग 1200 किलोग्राम होगी।
इस परियोजना को लोक निर्माण विभाग के मैकेनिकल विंग द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है, जिसकी कुल लागत 60.62 लाख रुपये है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनलके निर्देशों के अनुरूप किए जाने वाले इस निर्माण से न केवल अपशिष्ट जल का उपचार संभव होगा, बल्कि उसका उचित निस्तारण भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। इससे परिसर में जलजनित प्रदूषण को रोकने में मदद मिलेगी और एक सतत अपशिष्ट जल प्रबंधन प्रणाली की स्थापना हो सकेगी।
जीएमसी कठुआ के प्रधानाचार्य डॉ. सुरिंदर कुमार अत्री ने बताया कि पहले अकादमिक ब्लॉक में ऐसी कोई सुविधा नहीं थी। अब यह प्लांट न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान देगा, बल्कि संस्थान की स्वच्छता व्यवस्था को भी सुदृढ़ बनाएगा। उन्होंने बताया कि जीएमसी के सहायक अस्पताल में पहले से मौजूद सीईटीपी की क्षमता केवल 300 किलोग्राम है, जबकि अब अस्पताल में बेडों की संख्या में वृद्धि हो चुकी है। ऐसे में पुराने प्लांट को अपग्रेड करने की प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी।