जिले के पर्वतीय इलाकों में भारी बर्फबारी के बाद हिमाचल के राज्यपक्षी मोनाल पर शिकारियों की नजर है। आम तौर पर 3500 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर रहने वाले इस परिंदे की खूबसूरती ही इसके लिए ग्रहण बन गई है।
उच्च पर्वतीय इलाकों में छह से दस फुट तक बर्फ जमा है। मोनाल के बसेरे भी बर्फ से ढंक चुके हैं। बर्फ से लकदक पहाड़ों को छोड़कर मोनाल निचले इलाकों की ओर रुख कर गए हैं। बीते दो सप्ताह में बनी के ढ़ग्गर, रौलका, दौलका, खुडवा आदि इलाकों में मोनाल आम तौर पर देखे जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बनी का इलाका हिमाचल से सटा हुआ है, ऐसे में मोनाल यहां के उच्च पर्वतीय इलाकों में आम तौर पर देखे जाते रहे हैं।
जानकारों के अनुसार मोनाल 2200 मीटर की ऊंचाई से नीचे नहीं आते हैं, लेकिन इन दिनों जिन इलाकों में इन्हें देखा जा रहा है वहां शिकारी सक्रिय हो गए हैं। बर्फ की सफेद चादर से ढंके पहाड़ों पर मोर की ही तरह पंखों वाले यह पक्षी और भी खूबसूरत लगते हैं। शिकारियों की इसके माथे पर सजी कलगी पर नजर रहती है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग है। विलुप्त हो रही इस प्रजाति के शिकार पर पूरी तरह से प्रतिबंध है। यह आकर्षक पक्षी ज्यादा लंबी उड़ान नहीं भर पाता।
मोनाल के निचले इलाकों में आने के बाद वन विभाग सतर्क हो गया है। इस संरक्षित पक्षी को शिकारियों से बचाने के लिए वन विभाग की टीम लगातार नजर रखे हैं। डीएफओ बसोहली विजय कुमार वर्मा ने बताया कि यदि किसी ने मोनाल का शिकार करने का प्रयास किया तो उसके खिलाफ वन्य जीव संरक्षण एक्ट में मुकदमा दर्ज किया जाएगा। जम्मू कश्मीर वाइल्ड लाइफ एक्ट 1978 की धारा आठ के तहत यह पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसे मारने पर तीन साल की कैद, 25 हजार रुपये जुर्माना या फिर दोनों सजा हो सकती हैं।