जिला प्रधान सत्र न्यायाधीश ने छह साल पुराने पुजारी की निर्मम हत्या के मामले में आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आरोपी द्वारा की गई कथित स्वीकारोक्ति को कमजोर साक्ष्य माना है। इसके अलावा कोर्ट ने माना कि गवाहों के बयान विरोधाभासी थे और ज्यादातर गवाहों ने मृत पुजारी के बेटे रोहन लाल की बातों को ही दोहराया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष मंदिर में आरोपी की उपस्थिति सिद्ध नहीं कर पाया और न ही यह साबित हो पाया है कि आरोपी को मृतक के साथ अंतिम बार देखा गया था। कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इसके अलावा आरोपी के जमानती और व्यक्तिगत बांड को भी खारिज करने का आदेश दिया ।
पुलिस द्वारा कोर्ट में दाखिल की गई चार्जशीट के अनुसार पुलिस को 2 अगस्त 2019 को सूचना मिली थी कि एक अगस्त की आधी रात को आरोपी मदन लाल ने बनी के दौला माता मंदिर के पुजारी नगीना राम की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी। पुजारी का शव मंदिर के अंदर खून से लथपथ पड़ा था। मौके पर मौजूद लोगों ने बताया गया कि हत्या करने के बाद आरोपी मौके से भाग गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच की। पुलिस ने जांच में पाया कि एक अगस्त को मंदिर में भंडारा था। भंडारा खत्म होने के बाद सभी लोग घर चले गए थे, लेकिन आरोपी सहित सात लोग मंदिर में ही रुके रहे। उसी रात आरोपी मंदिर में घुसा और उसने पुजारी की धारदार हथियार से हत्या कर दी। पकड़े जाने के बाद आरोपी ने खुद अपना जुर्म कबूल किया था। इसके बाद पुलिस ने 30 जनवरी 2020 को अभियुक्त के विरुद्ध औपचारिक रूप से आरोप-पत्र दायर किया। इसमें अभियुक्त ने अपने विरुद्ध लगाए गए आरोपों को अस्वीकार कर दिया और मुकदमा चलाने की पेशकश की। कोर्ट के आदेश पर अभियोजन पक्ष ने कुल 25 गवाहों में 18 गवाहों को प्रस्तुत किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद पाया कि फॉरेंसिक जांच में खामियां हैं। इसमें हत्या में इस्तेमाल हथियार पर खून के निशान नहीं मिले। साथ ही आरोपी के कपड़ों और माथे से लिए गए खून के नमूने की पुष्टि नहीं हो सकी और हथियार पर आरोपी के फिंगरप्रिंट नहीं लिए गए। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि न्यायिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण उदाहरण है कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य इतने ठोस होने चाहिए ताकि किसी को दोषी ठहराया जा सके। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य के किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया।