बिलावर में वोल्टेज की स्थिति दर्शाता वोल्टमीटर।
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कठुआ। जिले में धान की रोपाई का सीजन तेज होने और पारा चढ़ने के साथ ही कम वोल्टेज की समस्या बढ़ गई है। 33 केवी लाइन में वोल्टेज जहां 29 केवी के आसपास उपलब्ध हैं, वहीं 11 केवी लाइन में भी वोल्टेज कम होकर नौ केवी के आसपास ही मिल पा रहे हैं। नतीजतन, कई फीडरों पर लोड बढ़ता जा रहा है, अघोषित कटौती हो रही है और कई जगह तो उपकरण वोल्टेज कम-ज्यादा होने से जलना शुरू हो गए हैं।
बिजली विभाग के लिए इस समय सबसे बड़ा सिरदर्द चनग्रां फीडर और हीरानगर ग्रिड बने हुए हैं। हीरानगर ग्रिड को अमूमन एनएचपीसी की सेवा परियोजना से बिजली हासिल हो जाती थी। लेकिन, इस बार सेवा परियोजना ठप है। इसे देखते हुए पिछले कुछ दिनों से ओवरलोड हो रहे हीरानगर ग्रिड को राहत देने के लिए कठुआ ग्रिड पर 24 घंटे में तीन घंटे की अतिरिक्त कटौती की जा रही है।
उधर, शहर के कुछ हिस्से समेत ग्रामीण इलाकों में बिजली सप्लाई करने वाले चनग्रां फीडर के हालात भी बुरे हैं। पिछले कुछ दिनों में जहां दो से तीन बार ट्रिपिंग सामने आ रही है, वहीं इस पर वोल्टेज कम होने की समस्या इतनी है कि पंखे चलना तक मुश्किल हैं। रात भर वोल्टेज कम-ज्यादा होने से उपकरणों के जलने का सिलसिला भी बढ़ता जा रहा है।
शहर के मुकाबले गांवों में ज्यादा कटौती
शहर के कई हिस्सों में बिजली कटौती ग्रामीण इलाकों के मुकाबले कम है। ग्रामीण इलाकों में अघोषित कटौती के अलावा वोल्टेज सामान्य न रहने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले एक सप्ताह से जिले में औसतन शहरी क्षेत्रों में पांच से छह घंटे की, तो वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में छह से दस घंटे तक बिजली कटौती हो रही है।