अदालत से... का लोगो लगाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने धमकी देने और चोट पहुंचाने के मामले में सबूतों के अभाव में आरोपी पति-पत्नी को बरी कर दिया। आदेश के मुताबिक अभियोजन पक्ष ठोस सबूत पेश कर पाने में विफल रहा है, इसलिए चालान खारिज किया जाता है। खुद शिकायतकर्ता ने अपनी गवाही में समर्थन नहीं किया, दोनों आरोपियों को दोषमुक्त किया जाता है।
पुलिस की ओर से दायर चार्जशीट के अनुसार, शिकायतकर्ता बिष्णो देवी पत्नी स्वर्गीय रतन चंद निवासी धनोड़ ने 4 फरवरी 2019 को लखनपुर थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। आरोप था कि उसका बेटा रविंद्र कुमार और उसकी पत्नी वीना देवी उसके साथ बुरा व्यवहार करते थे। इससे तंग आकर शिकायतकर्ता ने दोनों के खिलाफ बेदखली का एक विलेख निष्पादित किया। जब आरोपियों को इसका पता चला तो उन्होंने शिकायतकर्ता को विलेख रद्द करने के लिए धमकाना शुरू कर दिया।
नहीं मानने पर दोनों ने 3 फरवरी 2019 की रात उसके साथ बदसलूकी की। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरपीसी की धारा 451/323/504/506 के तहत मुकदमा दर्ज कर उनको गिरफ्तार कर लिया। 31 जनवरी को मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष की ओर से पेश गवाह आरोपियों के अपराध की पुष्टि करने में विफल रहे हैं। इससे आरपीसी की धारा 451 के तहत अतिक्रमण और धारा 323 के तहत मारपीट का मामला साबित होता हो।
इसके अलावा जांच अधिकारी ने भी कोई स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया, जबकि एक गवाह का कहना है कि घटना के समय गांव के तीन से चार लोग मौके पर मौजूद थे। इसलिए संदेह का लाभ आरोपी को मिलता है और चालान खारिज करने का आदेश दिया जाता है।