विश्व कैंसर दिवस आज ... का लोगो लगाएं
-
- दूरदराज इलाकों में लक्षणों को नजरअंदाज किए पर देरी से सामने आते हैं मामले
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले में कैंसर के सालाना दो सौ से अधिक मरीज जीएमसी कठुआ में रिपोर्ट हो रहे हैं। प्रदेश के बाहर संस्थानों में आने वाले जिले के मरीजों की संख्या अलग है। सामने आ रहे मामलों में पुरुषों में जहां गले और सिर का कैंसर तो वहीं महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर के मामले अधिक हैं।
जीएमसी कठुआ में उपचार उपलब्ध होने के बाद अब जिले के ज्यादातर मरीज यहीं इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। आयुष्मान योजना के तहत कवर यह मरीज योजना का लाभ भी ले रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सामने आ रहे मामलों में इनका इतिहास ज्यादातर तंबाकू उत्पादों से जुड़ा रहता है। इसके अलावा परिवार में कोई पूर्व में कैंसर पीड़ित रहा हो तो लक्षणों के बाद उसके भी कैंसर पीड़ित होने की संभावना बढ़ जाती है। जीएमसी कठुआ के टाटा मेमोरियल कैंसर संस्थान के साथ हुए करार के बाद जीएमसी के स्टाफ को रेडिएशन देने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। जटिल मामलों में भी मरीज टाटा संस्थान के न्यू चंडीगढ़ स्थित भाभा कैंसर सेंटर में रेफर किया जाता है। रेफर होने वाले मामलों में ल्यूकिमिया के केस होते हैं।
कैंसर ग्रस्त मरीजों के मामले में एडवांस स्टेज तक पहुंचने वाले मामले दूरदराज इलाकों से ज्यादा हैं। जहां लक्षणों के बाद भी मरीज स्थानीय स्तर पर इलाज करवाते रहते हैं। जब तक वे जीएमसी कठुआ पहुंचते हैं वे एडवांस स्टेज तक पहुंच चुके होते हैं। कठुआ, हीरानगर के इलाकों से सामने आने वाले कैंसर के मामलों में ज्यादातर मामले प्राथमिक चरण में ही पता लगा लिए जाते हैं। ऐसे में समय पर उपचार संभव हो जाता है।
............
सौ मरीज ले रहे आयुष्मान योजना का लाभ, कैंसर लाइलाज नहीं : डॉ. पवन भगत
ऑनकॉलोजी विभाग के एचओडी डॉ. पवन भगत ने बताया कि कैंसर लाइलाज नहीं है। इसे लेकर लोग भ्रमित हो जाते हैं। समय पर इसका उपचार मरीज की जान बचा सकता है। कई मामलों में देरी से पता चलने के बाद भी इलाज से मरीज को राहत मिली है। बताया कि मरीज का इतिहास, खानपान, तंबाकू आदि सेवन कैंसर के मुख्य कारणों में सामने आए हैं। बनी व बिलावर के दूरदराज इलाकों से आने वाले मरीजों के ज्यादातर मामले काफी देरी से पहुंचते हैं। ऐसे में जरा सा भी शक होने पर मरीज को तुरंत जांच करवानी चाहिए। खास तौर से उन लोगों को एहतियात बरतने की जरूरत है जिनके परिवार में कोई भी पूर्व में कैंसर पीड़ित रहा हो। उपचार के लिए इस्तेमाल होने वावी ज्यादातर दवाएं अब आयुष्मान योजना के तहत निशुल्क उपलब्ध हो रही हैं। सौ से ज्यादा मरीज ऐसे हैं जो आयुष्मान योजना का लाभ लेकर इलाज करवा रहे हैं।