कृषि विभाग की ओर से आयोजित कृषि मेले और प्रदर्शनी में किसानों को दी गई उन्नत तकनीक की जानकारी
कठुआ। कृषि विभाग की ओर से कृषि मेले और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। जिसमें किसानों को उन्नत कृषि की तक्नीकों की जानकारी दी गई।
उन्नत कृषकों की ओर से अपने उत्पादों की बिक्री के लिए जहां स्टॉल लगाए गए। वहीं, विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी पर मिलने वाले उपकरणों को भी प्रदर्शित किया गया। उधर, मेले के दौरान मुख्य अतिथि ने 40 लाभार्थियाें को सब्सिडी के ट्रैक्टर की चाबियां भी सौंपी। लखनपुर में आयोजित मेले का उद्घाटन मुख्य अतिथि, कठुआ के विधायक डॉ. भारत भूषण ने किया। उन्होंने जहां लगाए गए स्टॉल का निरीक्षण किया वहां किसानों से भी बात की। मेले के दौरान उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टॉल पर प्रदर्शित किए गए उत्पादों को विस्तृत विवरण लिया। साथ ही ज्यादा से ज्यादा किसानों को एचएपीडी योजना के तहत लाभ देने के लिए भी कहा।
विधायक ने कहा कि कृषि संबद्ध विभागों ने इस मेले में किसानों की सहूलियत के लिए अपने स्टॉल लगाए हैं। किसानों को दिए गए ट्रैक्टर किसानों को उन्नत बनाएंगे। कहा कि बागवानी की नई योजनाओं की यहां लगाए गए स्टॉल से किसानों को जानकारी मिली है। इसमें पारंपरिक बागवानी और खेती से आगे बढ़कर उन्हें काम करने और अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रयास रहेगा कि समय समय पर इस तरह के मेले आयोजित किए जाते रहें। विधायक ने कहा कि किसानों को जैविक खेती की ओर बढ़ाना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी लक्ष्य है। उम्मीद है यह मेला उनके लिए विकास के नए द्वार खोलेगा।
इस दाैरान 40 सब्सिडी ट्रैक्टर की चाबियां लाभार्थियों को सौंपी गई। मौके पर अधिकांश महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप की मशरूम हाथों हाथ बिकी, 22 हजार सेल हुई। तीन हजार मोमोज के 70 स्टॉल थे। निजी कंपनियों की ओर से स्टॉल लगाए गए थे। किरलोस्टकर, हांडा, मेसी, स्वराज ट्रैक्टर, जैन इरिगेशन एक हजार के लगभग और बिलावर बसोहली से आए ग्रुप के लिए मिनीबस भी लगाई गईं।
जलवायु मुताबिक खेती की ओर किसानों को किया जा रहा अग्रसर
कृषि निदेशक ए एस रीन ने बताया कि मेले में खेती बाड़ी से जुड़ी सभी योजनाओं को प्रदर्शित किया गया है ताकि अपने रूझान के अनुसार योजना का लाभ ले सकें। उन्होंने बताया कि हाइड्रोपॉनिक तक्नीक से एग्जॉटिक सब्जियां और फल लगाए जा रहे हैं। तसल्ली है कि किसानों को अच्छा रूझान मिलेगा। आचार, जैम, शहद और इससे जुड़ी चीजों पर काम करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ताकि उत्पादों को उगाने के बाद इनका वैल्यू एडिशन कर बेहतर आय भी हासिल कर सकें। निदेशक ने बताया कि मौसम का असर जरूर है। लेकिन इस चुनौती से निपटने के लिए कलाइमेट रेजिलिऐंट, मौसम अनुकूल वैराइटी लाई गई है। इन्हें सिंचाई की कम जरूरत है। पॉलीटेंट, जियो टैंट किसानों को सब्सिडी पर दे रहे हैं। इसमें 80 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। ऐसे खेती जिसमें पानी के कम इस्तेमाल से खेती की जा सके। उन्होंने बताया कि कठुआ में उप उष्ण कटिबंधीय, मध्यवर्ती और उष्ण कटिबंधीय मौसम है। यहां पहाड़ी आलू के लिए कैपेक्स बजट के तहत सरथल में आलू बीज फार्म तैयार किया जा रहा है। लैवेंडर की खेती शुरू की गई है। नीमाटोड के खतरे को लेकर उन्होंने कहा कि इसका ज्यादातर असर रामबन के इलाके में है।
कृषि मेले का लक्ष्य किसानों को एक मंच पर लाना। उन्हें एक ही छत के नीचे सभी योजनाओं की जानकारी देने के साथ ही लाभान्वित करना भी है। एचएपीडी के तहत समग्र रूप से विभिन्न विभाग किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें समृद्ध करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मेले में एक हजार के लगभग किसानों ने शिरकत की है।
-संजीव राय गुप्ता
मुख्य कृषि अधिकारी
ट्रैक्टर सब्सिडी के लिए आवेदन किया था। उम्मीद थी कि यहां आवेदन करने पर जल्द मिलेगा, लेकिन यहां भी एक साल बाद बताया जा रहा है। इस तरह के मेले सिंगल विंडो की तरह काम करने चाहिए। किसानों को मौके पर ही लाभ दिलाने के लिए काम होना चाहिए। बताया कि उन्हें दो साल पहले हल्दी लगाने के लिए प्रेरित किया गया था। लेकिन दो साल से उगाने के बाद वो हल्दी का बाजार नहीं मिला है। ऐसे में कठुआ में किसानों के लिए बाजार की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।
-किसान लाल चंद
मेले की जानकारी मिली तो नए उपकरणों के बारे में जानने की जिज्ञासा मेले में ले आई। यह न सिर्फ एक अन्य किसानों से मिलने का मौका था, बल्कि यह भी जानने का अवसर था कि विभाग की ओर से किसानों के लिए कौन कौन सी योजनाएं चलाई जा रही हैं।
-किसान गणेश दास
सब्जियों की खेती करते हैं। यहां नई तकनीक के बारे में जानने आए थे। विभाग की ओर से समय समय पर इस तरह के मेले आयोजित किए जाने चाहिए। ताकि लोगों को प्रोत्साहन मिल सके।
-किसान पवन कुमार
मुझे लोडर चाहिए था,लेकिन यहां बेच रही कंपनियां साढ़े तीन लाख रूपए कीमत बता रही हैं। पंजाब में स्थानीय लोडर की कीमत एक लाख है। ऐसे में यहां से लेना उन्हें समझदारी नहीं लगा। हालांकि इसके अलावा भी उन्होंने मेले में अन्य योजनाओं की जानकारी ली है।
-किसान जनकार चंद
मेले में छाया मोटे अनाज का स्टॉल
कठुआ। पथवाल का मिलट, मोटे अनाज का रेस्त्रां, लखनपुर के किसान मेले में छाया रहा।
किसानों, अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ साथ अन्य स्टॉल के साथ आए लोगों ने भी इसका खूब जायका किया। जिला पहला मोटे अनाज का रेस्त्रां चलाने वाली पूजा देवी ने बताया कि विभाग की ओर से किसान मेले में उन्हें स्टॉल लगाने के लिए आमंत्रित किया गया था। सेल्फ हेल्प ग्रुप की अन्य सदस्यों के साथ इसकी तैयारी कर वे मेले में पहुंची और लोगों का बेहतरीन सहयोग मिला है। रागी से बने डोसा और मोमोज हाथों हाथ बिक गए। उन्होंने बताया कि इस रेस्त्रां का मकसद लोगों को जायके के साथ पारंपरिक खान पान से जोड़ना है।
मैदा छोड़कर लोग अब मोटे अनाज को पंसद करने लगे हैं, ऐसा प्रतीत हो रहा है कि उनकी मेहनत रंग ला रही है।
उधर, मेले में अन्य सेल्फ हेल्प ग्रुप की ओर से मशरूम, हल्दी सहित अन्य उत्पादों को बिक्री के लिए लाया गया। आचार, मुरब्बा, जैम, घी से लेकर हल्दी, मसाले, शहद और गुड़ शकर भी खूब बिके। मेले में मशरूम की बिक्री भी अच्छी हुई है। संवाद