कठुआ में रेलवे के लिए चुनौतियों से भरा रहा वर्ष
कठुआ। 1970 के दशक से रेल सेवा से जुड़ा कठुआ जिला आज बदलते समय की नई जरूरतों का सामना कर रहा है। दरअसल पिछले कुछ वर्षों में जिले की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। औद्योगिक विकास ने इस जिले को एक नए आयाम पर पहुंचा दिया है।
गोविंदसर, महरोली और भागथली घाटी जैसे औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना ने कठुआ को क्षेत्रीय औद्योगिक केंद्र बना दिया है। इन क्षेत्रों में काम करने के लिए देशभर से लोग आ रहे हैं जिससे जिले की जनसंख्या और यात्री दबाव दोनों तेजी से बढ़े हैं।
वहीं, रेलवे सेवाओं की अहमियत अब केवल स्थानीय यात्रियों तक सीमित नहीं रही बल्कि औद्योगिक गतिविधियों और माल ढुलाई की बढ़ती जरूरतों से भी जुड़ गई है। ऐसे में रेलवे का विकास केवल यात्री सुविधा ही नहीं बल्कि आर्थिक प्रगति और औद्योगिक विस्तार का भी आधार बन गया है।
इस वर्ष रेलवे ने जहां कुछ विकास कार्यों से उम्मीदें जगाईं। वहीं प्राकृतिक आपदाओं और अधूरी सुविधाओं ने यात्रियों और उद्योगों दोनों को कठिनाइयों में डाले रखा। यही कारण है कि कठुआ जिले में रेलवे का विकास अब केवल सुविधा नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुका है।
प्राकृतिक चुनौतियाें से रेल ढांचे की क्षति
- भारी बारिश और बाढ़ के चलते रवि दरिया पर बने पुल का एक पिलर क्षतिग्रस्त हुआ। जिससे अगस्त माह से ही रेलवे के एक ट्रैक पर ट्रेनों का परिचालन बंद पड़ा है।
- हीरानगर और घगवाल के बीच बने पुल को भी नुकसान पहुंचा। जिससे एक ट्रैक लगभग तीन महीने तक ठप रहा।
कठुआ रेलवे के विकास कार्य
- प्लेटफार्म नंबर 1 और 2 के जर्जर फर्श को दोबारा बनाया गया।
- प्लेटफार्म नंबर 1 पर यात्री सुविधा हेतु शौचालय का उन्नयन किया गया।
- प्लेटफार्म नंबर 2 पर आज भी शौचालय और यात्री सीटों की कमी बनी हुई है।
- छन्न अरोड़ियां में गुड्स शेड की शुरूआत
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जम्मू-पठानकोट रेल मार्ग पर पड़ने वाले जम्मू कश्मीर के पहले कठुआ रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन लगभग 43 जोड़ी ट्रेनों का आवागमन होता है जिनमें से 30 जोड़ी यात्री ट्रेनें यहां ठहरती हैं। इसमें प्रतिदिन 2000 से अधिक यात्री इस स्टेशन से यात्रा करते हैं लेकिन सुविधाएं अपर्याप्त हैं। वहीं, कोरोना काल में बंद हुई प्रमुख ट्रेनें टाटा मूरी, संभलपुर एक्सप्रेस और भटिंडा एक्सप्रेस अब तक बहाल नहीं हो पाई हैं जबकि माल ढुलाई में प्रगति हुई है, यहां छन्न आरोड़ियां और कठुआ रेलवे स्टेशन पर नए गुड्स शेड का निर्माण पूरा हुआ। जहां माल ढुलाई का काम शुरू हो चुका है। वर्ष 2025 ने यह स्पष्ट किया कि कठुआ में माल ढुलाई और कुछ बुनियादी सुधारों में प्रगति हुई है, वहीं यात्री सुविधाओं और ट्रेन सेवाओं की बहाली अब भी अधूरी है। आने वाले वर्ष में यात्रियों की अपेक्षाओं को पूरा करना रेलवे प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी।