कठुआ। जम्मू-कश्मीर की बेटियों को विवाह में सरकारी सहायता के लिए आठवीं पास होने की शर्त को हटाए जाने पर महिला अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली सामाजिक कार्यकर्ताओं ने खुशी जताई है। उनका कहना है कि इससे अब सरकार की योजनाओं का लाभ सभी बेटियों को मिल पाएगा।
क्योंकि पहले धनराशि को प्राप्त करने के लिए आठवीं पास होना जरूरी था। इस कारण समाज कल्याण विभाग के माध्यम से मिलने वाले इस सहायता के तहत जारी वित्तीय वर्ष में जिले की ऐसे 30 आवेदनों को विभाग ने इसी समस्या के चलते रद्द कर दिया है। मगर अब शर्त को हटाए जाने की कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद यह महिलाओं के लिए बड़ी राहत हो सकती है
विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने महिलाओं की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए हर बेटी की शादी के लिए आर्थिक सहायता देने घोषणा की थी। मगर इसमें आठवीं उत्तीर्ण होने की शर्त एक बड़ी बाधा बन रही थी जो जम्मू कश्मीर की हर बेटी को इसका लाभ लेने से वंचित कर रही थी। हर बेटी को शिक्षित होना चाहिए इसमें कोई शक नहीं है लेकिन इसके कारण किसी सरकारी सरकारी सहायता से आवेदक को वंचित किया जाना भी ठीक नहीं था। इसे सरकार ने सुधार है इसके लिए सरकार का आभार लेकिन इस प्रक्रिया को तेज और सरल भी बनाने की जरूरत है।
संतोष खजूरिया, प्रधान जम्मू कश्मीर महिला अधिकार संगठन
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कई लड़कियां परिस्थितियों के कारण शिक्षा से वंचित रही हैं। उन्हें आठवीं पास होने की शर्त के कारण इस सहायता से वंचित किया जा रहा था। अब योग्यता की शर्त हटने से बहुत सारी बेटियों को बड़ी राहत मिलेगी। यह कदम सच में बेटियों के सशक्तीकरण की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव है। इससे उन्हें आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने का विश्वास मिलेगा। सरकार का यह कदम सराहनीय है।
- सत्यदीप शर्मा, रोटरी क्लब कठुआ