औद्योगिक मजदूर उपचार पाने के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज जाने के लिए मजबूर
कठुआ। शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (यूपीएचसी) गोविंदसर को स्थापना के 10 साल बाद भी डॉक्टर नसीब नहीं हुआ है। इससे दो पंचायतों सहित बड़ी संख्या में औद्योगिक मजदूर उपचार के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ जाने को मजबूर हैं।
वर्तमान में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत नियुक्त स्टाफ ही केंद्र को चला रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चार साल पहले स्वास्थ्य मिशन के तहत एक डॉक्टर की अस्थायी तौर पर नियुक्ति की गई थी जो एक सप्ताह के भीतर ही इस्तीफा देकर चलीं गईं। इसके बाद यहां किसी भी डॉक्टर की तैनाती नहीं हुई।
गोविंदसर गांव में यूपीएचसी को साल 2015 के जनवरी महीने में स्थापित किया गया था। केंद्र का उद्घाटन करने पहुंचे तत्कालीन उपायुक्त डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी सहित मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्वास्थ्य केंद्र में एमबीबीएस डॉक्टर सहित इसकी अपनी इमारत की व्यवस्था की घोषणा की थी। न तो स्वास्थ्य केंद्र को इमारत मिली और न डॉक्टर की तैनाती हुई है। शहर से सटी दो पंचायत गोविंदसर-ए और गोविंदसर-बी में काम करने वाले मजदूरों सहित रेलवे कर्मियों के लिए यह एकमात्र अस्पताल है।
किराये के मकान में चल रही यूपीएचसी की पहली मंजिल
शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गोविंदसर की पहली मंजिल किराये के मकान में चल रही है। इसके चलते मरीजों को वहां पहुंचने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। गांव के बुजुर्ग मरीज अपना इलाज करवाने और गर्भवती महिलाएं टीकाकरण करवाने के लिए यहां आने में हिचकिचाते हैं। स्थानीय लोगों की मांग है कि कम से कम स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था ऐसी इमारत में हो जहां लोग आसानी से उपचार करवा सकें।
ज्यादातर पीएचसी बिना डाक्टरों से चल रहे हैं। इसको लेकर हाल ही में कठुआ का दौरा करने पहुंचे निदेशक स्वास्थ्य जम्मू के संज्ञान में लाया जा चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि जल्द डॉक्टरों की कमी दूर होगी।
- विजय रैना, जिला मुख्य
चिकित्सा अधिकारी