कठुआ। जिला के पहाड़ी इलाके सड़क हादसों और आपात स्थितियों में बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के उद्देश्य से स्थापित महानपुर टॉमा सेंटर लंबे समय से गंभीर डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। करोड़ों की राशि सेंटर में स्थापित स्वास्थ्य मशीनरी बिना स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से धूल फांक रही है।
इस ट्रॉमा सेंटर की दयनीय स्थिति का अंदाजा सिर्फ इस बात से लगाया जा सकता है कि स्वीकृत 10 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की जगह मात्र एक पैथालॉजिस्ट ही उपलब्ध है, जबकि दूसरा एनेस्थेसियोलॉजिस्ट को शहर के नजदीक किसी अस्पताल में अटैच किया गया है। जबकि सात मेडिकल ऑफिसर की जगह सिर्फ चार ही उपलब्ध है। वहीं, सर्जन, ऑर्थोपेडिक, फिजिशियन, न्यूरोलॉजिस्ट, रेडियोलोजिस्ट जैसे पद खाली होने जिले के पहाड़ी क्षेत्र के तीन उपजिला बसोहली, बनी और बिलावर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे है। वर्तमान सिर्फ चार चिकित्सा अधिकारी और एक स्पेशलिस्ट के सहारे ट्रॉमा सेंटर को चलाया जा रहा है। दरअसल, एक दशक पहले कार्यात्मक बनाएंगे इस ट्रॉमा सेंटर में कभी भी स्वीकृत न तो विशेषज्ञ डॉक्टरों की और न ही चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति नहीं गई। जिसके चलते करोड़ों की लागत से बना यह सेंटर मात्र दिन में चिकित्सा अधिकारियों की ओपीडी सुविधा तक ही सीमित रह गए है। अगर कभी आपात स्थिति में कोई दुर्घटना ग्रस्त मरीज अस्पताल में आता है, तो उसे तुरंत मरहमपट्टी कर राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ रेफर कर दिया जाता है।