कठुआ। लगभग 70 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले पहाड़ी उपजिला बसोहली में स्वास्थ्य सुविधा पूरी तरह चरमराई हुई है।
स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर स्थापित दो बड़े संस्थान उपजिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर महानपुर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के अभाव में चिकित्सा अधिकारियों के सहारे चलाए जा रहे हैं। कहने को तो उपजिला अस्पताल में पांच विशेषज्ञों डॉक्टरों के पद है लेकिन वर्तमान में एक भी तैनात नहीं हैं। यही हाल ट्रामा सेंटर महानपुर का है। इसमें 10 स्पेशलिस्ट की जगह आठ पद लंबे समय से रिक्त पड़े हुए हैं। इसके चलते डेढ़ लाख की ज्यादा आबादी वाले लोगों को बेहतर इलाज के लिए विशेषज्ञों की सलाह के लिए या तो राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) कठुआ या फिर जीएमसी जम्मू और एम्स विजयपुर जाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार बसोहली में दो बड़े स्वास्थ्य संस्थानों के स्वीकृत 15 स्पेशलिस्ट डॉक्टरों में से 13 पद रिक्त पड़े हुए हैं जबकि चिकित्सा अधिकारियों के स्वीकृत 35 पदों में से 25 पद खाली हैं।
बसोहली के स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की भारी कमी के चलते केंद्रीय मंत्री डॉ. जतिंद्र सिंह ने बीते जुलाई महीने में बसोहली अस्पताल में एम्स ओपीडी शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन यह घोषणा भी मात्र एक घोषणा बनकर रह गई है। तीन महीने बाद न तो एम्स के किसी डॉक्टर ने स्वास्थ्य सुविधा प्रदान की और उपजिला अस्पताल का कोई पद भर पाया है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मानें तो अभी तक एम्स ओपीडी को लेकर विभाग को कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है। इस कारण लोगों में निराशा और नाराजगी बढ़ती जा रही है।
उपजिला अस्पताल में पांच-पांच स्पेशलिस्ट और मेडिकल ऑफिसर के पद रिक्त : लगभग यही दयनीय स्थिति उपजिला अस्पताल की भी है। जहां पांच स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के स्वीकृत पदों में से स्त्री रोग विशेषज्ञ, चिकित्सक, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट, बाल रोग और हड्डी रोग विशेषज्ञ के पद पिछले कई सालों से तैनाती नहीं की गई है। स्वीकृत 11 चिकित्सा अधिकारियों में से पांच पद खाली पड़े हुए हैं। दरअसल, उपजिला अस्पताल को लंबे समय से छह चिकित्सा अधिकारियों के सहारे चल रहा है जो केवल सिर्फ मरहम पट्टी तक ही सीमित है।