कठुआ। देश के अलग-अलग राज्यों में बच्चों की मौत के मामले को देखते हुए जिला स्वास्थ्य विभाग ने डेक्सट्रोमेथोर्फन साल्ट का स्वास्थ्य संस्थानों में इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है। जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय रैना ने बताया कि स्वास्थ्य संस्थानों में संबंधित विभाग की ओर से आपूर्ति पर रोक लगा दी है।
इसके अलावा स्वास्थ्य अधिकारियों को हिदायत दी गई है कि अगर किसी संस्थान के पास डेक्सट्रोमेथोर्फन साल्ट का स्टॉक पड़ा हुआ है तो उसको मरीजों को देने के लिए फिलहाल रोक लगा दी है।
डॉ. रैना ने बताया कि इस साल्ट का मुख्य इस्तेमाल सूखी खांसी का इलाज करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से देश के अलग-अलग राज्यों से इसके इस्तेमाल से बच्चों की मौतों की खबरें आने से इसे इस्तेमाल करने पर तत्काल रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि जब तक सरकार इसके कारणों का पता नहीं लगा लेती, तब तक इस पर रोक रहेगी। इसके अलावा उन्होंने लोगों से भी आग्रह किया है कि बिना डॉक्टर को दिखाए किसी भी दवा का इस्तेमाल न करे। उन्होंने शंका जताई है कि लोग अपने फोन से गूगल कर बिना किसी डॉक्टर की सलाह से खांसी या अन्य बीमारियों की दवाई ले लेते है, जो कि गलत तरीका है। लिहाजा लोगों से भी आग्रह है कि एक डॉक्टर ही बता सकता है कि किस तरह की खांसी के लिए कौन सा दवाई लेनी चाहिए। डॉ. रैना ने बताया कि दरअसल सस्ते साल्ट के नाम पर कई बार लोकल कंपनियां भी कई तरह के दवाइयां बाजार में ले आती हैं, जिसके चलते इस तरह के मामले सामने आते है। लिहाजा लोग बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी साल्ट को न खरीदे।