हीमोडायलिसिस की सुविधा भी बढ़ेगी, मशीनों की संख्या छह से बढ़कर होगी आठ
पहले 10 से 12 लोगों को मिलती थी हीमोडायलिसिस, अब 15 लोगों को मिलेगी
कठुआ। राजकीय मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) कठुआ में अब आकस्मिक स्थिति में आने वाले मरीजों को पेरिटोनियल डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। अस्पताल प्रशासन ने पांच नई डायलिसिस मशीनों की स्थापना की प्रक्रिया शुरू कर दी है जिससे एक माह के भीतर मरीजों को यह सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। नई सुविधा को जीएमसी कठुआ का जनरल मेडिसिन विभाग संचालित करेगा।
इसके अलावा अस्पताल में पहले से चल रही हीमोडायलिसिस की सुविधा में भी बढ़ोतरी की जा रही है। इसमें पहले से मौजूद छह मशीनों के अलावा दो नई मशीनों को भी स्थापित किया जा रहा है। ऐसे में पहले मात्र 10 से 12 लोगों को हीमोडायलिसिस की सुविधा मिलती थी। अब यह 15 लोगों को मिल सकेगी। पेरिटोनियल डायलिसिस की नई मशीनें लगने से अन्य मरीजों को भी लाभ मिलेगा। दरअसल ज्यादा छोटे बच्चों के लिए पेरिटोनियल डायलिसिस बेहतर विकल्प है। बच्चों के लिए पेरिटोनियल डायलिसिस की प्रक्रिया को स्कूल में भी संपन्न किया जा सकता है। कामगार लोगों के लिए भी यह एक आरामदायी प्रक्रिया है। ऐसे मरीज जो किसी कारण के चलते बिस्तर पर हों और हफ्ते में तीन दिन बाहर आने में असमर्थ हों उनके लिए पेरिटोनियल डायलिसिस बेहतर विकल्प है।
तीन माह पूर्व विश्व बैंक से प्राप्त सहयोग के तहत अतिरिक्त मशीनें जोड़ी गईं और प्रतिदिन डायलिसिस को दो चरणों में बांटा गया। इससे अब 300 मरीजों को मासिक आधार पर सुविधा मिल रही है। साथ ही संक्रमण से पीड़ित मरीजों (एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, सी) के लिए अलग मशीन उपलब्ध करवाई गई है जिससे सामान्य मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
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सरकार के निर्देश अनुसार निर्धारित होगा शुल्क
- आयुष्मान भारत कार्डधारक और पीएचएच लाभार्थी मरीजों के लिए यह सेवा पूरी तरह निशुल्क है।
- सामान्य वर्ग के मरीजों से 950 रूपए प्रति सत्र का राजस्व शुल्क लिया जा रहा है।
- पेरिटोनियल डायलिसिस के लिए शुल्क की व्यवस्था सरकार की ओर से जारी दिशानिर्देशों के अनुसार तय की जाएगी।
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पेरिटोनियल डायलिसिस के फायदे
निरंतर रूप से प्राकृतिक किडनी की तरह काम करता है।
आहार संबंधी प्रतिबंध कम होते हैं।
आपके घर या आपके हिसाब से अनुकूल स्थान पर प्रक्रिया की जा सकती है।
सोते समय भी प्रक्रिया पूरी की जा सकती है।
यात्रा करने पर कोई रोक नहीं होती।
आपकी मर्जी से संपन्न होने वाली प्रक्रिया
कोट
पेरिटोनियल डायलिसिस सेवा का संचालन जनरल मेडिसिन विभाग की ओर से किया जाएगा। साल 2019 से सहायक अस्पताल में राष्ट्रीय जिला डायलिसिस कार्यक्रम (एनडीडीपी) के तहत हीमोडायलिसिस की सुविधा मौजूद है जिसके लिए पहले छह मशीनें स्थापित की गई थीं। इन मशीनों से प्रति माह लगभग 160 मरीजों को डायलिसिस सेवा दी जा रही थी।
- डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री, प्रधानाचार्य, जीएमसी कठुआ