कठुआ। गेहूं की फसल बर्बाद करने के मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर के आदेशानसुार अभियोजन पक्ष अभियुक्त के खिलाफ मामला साबित करने में विफल रहा।
इसके अलावा यह भी साबित नहीं हो पाया कि शिकायतकर्ता के पास जमीन का कब्जा था और उसने ही गेहूं की फसल को बोया था। कोर्ट में दायर मामले के अनुसार आरोपी तरसेम लाल और प्रेम लाल पुत्र थोरू राम और सुनील कुमार पुत्र तरसेम लाल तीनों निवासी गडयाल हीरानगर पर शिकायतकर्ता की 3 कनाल 10 मरला गेहूं की फसल को नष्ट करने का आरोप था। 26 फरवरी 2013 के दर्ज मामले के अनुसार तीन आरोपियों ने जहरीली राउंड अप स्प्रे का इस्तेमाल कर शिकायतकर्ता की 20 हजार की फसल नष्ट कर दी थी। इसके बाद शिकायतकर्ता रामकृष्ण की शिकायत पर राजबाग थाने में आरपीसी की धारा 447/427 दर्ज कर तीनों आरोपियों के खिलाफ 17 फरवरी 2014 को न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया था। तीनों आरोपियों ने कोर्ट में अपराध करने से इनकार किया और मुकदमे की मांग की थी।
इसके बाद अभियोजन पक्ष को साक्ष्य प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। अभियोजन पक्ष ने मामले के समर्थन में कुल आठ में से छह गवाहों से पूछताछ की। सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष के किसी भी गवाह ने गवाही में अभियुक्तों की ओर से किए गए अपराध के साथ नहीं जोड़ा है।
चालान को खारिज कर अभियुक्तों को बरी करने की अपील गई। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद और उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन करने पर पाया कि गवाही में विरोधाभास है। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा है कि शिकायतकर्ता के पास ज़मीन का कब्जा था और गेहूं की फसल को अभियुक्त ने ही नष्ट था।