अंतिम चरण में चल रहा कठुआ नहर की मरम्मत का काम
कठुआ। जम्मू-कश्मीर के प्रवेशद्वार लखनपुर रावी दरिया में आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त हो चुकी कश्मीर नहर को बहाल करने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है।
नवंबर महीने से गेहूं की बिजाई से पहले किसानों को नियमित रूप से पानी मिल सकेगा। पंजाब सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार क्षतिग्रस्त नहर के 300 मीटर हिस्से पर तेजी से कार्य किया जा रहा है जोे कुछ दिनों में पूरा कर लिया जाएगा।
इसके बाद माधोपुर बैराज से कश्मीर नहर में पानी छोड़ा जा सकता है। रावी दरिया में 24 अगस्त को आई अचानक बाढ़ से लखनपुर के पास 300 मीटर के करीब कश्मीर नहर का हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से जम्मू-कश्मीर को चुकंदर फीडर से 400 क्यूसेक पानी मिलना बंद हो गया था। इससे जिला कठुआ के निचले इलाके की 1200 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है।
माधोपुर बैराज से कश्मीर नहर से छोड़ा जाता है 1050 क्यूसेक पानी
रावी दरिया के माधोपुर बैराज से पंजाब सिंचाई विभाग द्वारा 1050 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। इसमें से 400 क्यूसेक पानी चुकंदर फीडर से कठुआ नहर द्वारा जम्मू-कश्मीर को मिलता है जबकि 150 क्यूसेक पानी कश्मीर नहर से लिफ्ट कर रावी तवी नहर के माध्यम से जम्मू-कश्मीर को मिलता है। बाकी शेष पानी पंजाब को किसानों को दिया जाता है। वहीं, पंजाब सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि क्योंकि अभी कश्मीर नहर को अस्थाई तौर पर ही बहाल किया जा रहा है। इसके चलते वर्तमान में नहर की क्षमता के अनुसार ही पानी छोड़ा जाएगा लेकिन गेहूं बिजाई के लिए किसानों को उचित पानी की व्यवस्था होगी।
अस्थायी तौर पर कश्मीर नहर के क्षतिग्रस्त हिस्से को लगभग पूरा कर लिया है। माधोपुर बैराज के पास बाढ़ से जमा मलबे को भी हटाने का काम चल रहा है। अगले कुछ दिनों में माधोपुर बैराज से पानी छोड़े जाने की संभावना है।
- प्रदीप गौतम, कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग पंजाब
कश्मीर नहर में माधोपुर से पानी छोड़ने को लेकर लगातार पंजाब के सिंचाई विभाग के संपर्क में है। अगले कुछ दिनों में नहर में पानी छोड़े जाने की पूरी संभावना है। कश्मीर नहर बहाली का कार्य पूरा हो चुका है। बिजाई के लिए किसानों को उचित पानी की व्यवस्था करवाई जाएगी।
-संजय नागपाल
कार्यकारी अभियंता सिंचाई विभाग
लखनपुर में बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुई नहर के स्थान पर बनाई जा रही अस्थायी नहर। संवाद