आपसी भाईचारे और एकता का है प्रतीक
आपसी भाईचारे और एकता का प्रतीक माने जाने वाले गढ़ माता मंदिर में जहां एक ओर जम्मू-कश्मीर के बनी से सटे इलाकों के साथ साथ भद्रवाह, बसोहली और कठुआ से लोग पहुंचते हैं। दूसरी ओर, हिमाचल में बनीखेत, डलहौजी, चंबा और पंजाब के पठानकोट से भी श्रद्धालु माथा टेकने के लिए आते हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो यह मंदिर दोनों राज्यों को एक दूसरे की संस्कृतियों से जोड़ने का बेमिसाल काम करता है। प्रकृति की गोद में बसे गढ़ माता मंदिर में हर साल पहुंचने वाले हजारों श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहां मांगी गई सभी मुराद पूरी होती है।
दोनों राज्यों की कमेटियां करती हैं आयोजन
मां चामुंडा के दर पर आयोजित मेले में हाजिरी देने के लिए हिमाचल के चंबा जिला और जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले से लोग कई-कई घंटे का पैदल सफर तय कर पहुंचे। मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगना शुरू हो गया। दोपहर होते तक मंदिर प्रांगण में पहुंचे भक्तों की संख्या तीस हजार के लगभग पहुंच गई। उधर, दोनों राज्यों की ओर से मेले का आयोजन करने वाली कमेटी ने भी भक्तों के लिए इंतजाम किए थे। दूरदराज के इलाकों से पैदल चलकर आए भक्तों के लिए लंगर की भी व्यवस्था की गई। माता के दरबार पर पहुंचे भक्त नाचते गाते हुए पारंपरिक ढोल और बांसुरी की ताल पर पहुंचे। चढ़ावा चढ़ाने के साथ दोनों राज्यों के भक्तों ने अपने परिवार की खुशहाली की भी कामना की। मंदिर प्रांगण में दर्शनों को पहुंचे भक्तों ने कुड नृत्य कर परंपरा को निभाया। इस दौरान पूरा इलाका मां चामुंडा के जयघोष से गूंज उठा।