जम्मू में रहने वाले कश्मीरी पंडित परिवारों के सामने रोटी संकट खड़ा हुआ है। तीन महीने से विस्थापित कश्मीरी पंडितों को सरकारी राशन नहीं मिला है। कश्मीरी पंडितों को केंद्र सरकार की खुली बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत राशन आपूर्ति की जाती थी, लेकिन इस योजना को केंद्र सरकार स्थगित किया हैं, जिसके कारण जम्मू की विभिन्न विस्थापित कॉलोनी में रहने वाले 20 हजार कश्मीरी पंडित परिवारों सरकार राशन से वंचित हैं।
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ओएमएसएम योजना के तहत प्रति परिवार को 13 किलो राशन मिलता था। इसमें नौ किलो चावल, दो किलो आटा और एक किलो चीनी थी। केंद्र सरकार ने योजना को बंद कर दिया। ऐसे में प्रदेश सरकार ने इन लोगों को अपने कोटे से राशन देना से मना कर दिया, जिससे इन परिवारों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गए है। राशन आपूर्ति नहीं होने से लोग जगती सहित अन्य विस्थापित कॉलोनी में प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन न तो राहत आयुक्त विभाग और न ही सरकार सुनवाई कर रही है।
माइग्रेंट कॉलोनी में बने राशन डिपो में राशन की आपूर्ति नहीं होने से ताले लटके हैं। विस्थापित कैंप में रहने वाले वाले कश्मीरी पंडितों की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है। ज्यादातर परिवारों के लिए हर माह मिलने वाला राशन ही सहारा है। बढ़ती महंगाई में कम दाम पर मिलने वाले राशन लोगों के लिए बड़ी राहत मिलती है, लेकिन तीन महीने से लोग इससे वंचित है। खाद्य आपूर्ति विभाग का कहना कि हम कश्मीरी पंडितों को अपने कोटे से राशन नहीं दे सकते हैं। केंद्र सरकार ओएमएमएस योजना बहाल करेगी तो राशन आपूर्ति होगी।
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ओएमएमएस योजना के तहत प्रदेश को राशन आपूर्ति केंद्र करता है, जिसके तहत कश्मीरी पंडितों को भी राशन आपूर्ति होती थी। इसे केंद्र सरकार ने बंद किया। जल्द फिर से शुरू होने की उम्मीद है। - केके सिद्दा, राहत आयुक्त, जम्मू ।
केंद्र सरकार ने ओएमएमआर योजना बंद की है। हमारे पास कश्मीरी पंडितों को राशन देना का कोई प्रावधान नहीं है। राशन आपूर्ति की बहाली होने के बाद ही राशन दे पाएंगे। - नसीम जावेद चौधरी, निदेशक, खाद्य आपूर्ति विभाग, जम्मू।
तीन महीने से राशन नहीं मिला है। कई बार राहत आयुक्त कार्यालय और खाद्य आपूर्ति विभाग को अवगत करवाया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। सरकार सिर्फ दावे करते हैं, लेकिन जमीनी स्थिति बहुत खराब है। -रमेश सूरी, कश्मीरी पंडित।
कश्मीरी पंडितों के नाम पर राजनीति करने वाले अब कहां हैं। तीन महीने से राशन नहीं मिला है। हर विभाग की अपनी-अपनी कहानी है। हमें उनकी योजनाओं से नहीं राशन से मतलब है। राशन आपूर्ति को बहाल किया जाए। - शादी लाल पंडिता
विस्थापित कैंप में 20 हजार से अधिक कश्मीरी पंडित रहते हैं। तीन महीने से राशन बंद है। महंगाई बढ़ रही है, बाजार में चावल के दाम और सरकार डिपो से मिलने वाले चावल के दाम में बड़ा अंतर है। राशन आपूर्ति बहाल हो। - काशी नाथ भट।