कठुआ। जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में यहां-वहां पार्क होने वाले वाहनों को अब सीधा अस्पताल पार्किंग की ओर ही रुख करना होगा। इसके लिए अस्पताल प्रबंधन की ओर से मुख्यद्वार पर बेरिकेड लगा दिए गए हैं। अब इस बेरिकेडिंग से आगे केवल स्टाफ और मरीजों को लेकर आने वाले वाहनों को जाने की इजाजत होगी। इस व्यवस्था से परिसर में आने जाने वाले रास्ते को सुविधाजनक बनाए रखने में मदद मिलेगी।
शुक्रवार से शुरू हुई इस व्यवस्था के बाद हाइवे की ओर से आने वाले गेट से होने वाली एंट्री के बाद बेरिकेडिंग लगा दी गई है। यहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने आने वाले वाहनों को पार्किंग की ओर भेजने का काम शुरू कर दिया है। ई-रिक्शा की सुविधा के लिए लोगों को अस्पताल के गेट तक आना होगा।
जिले के इस सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में प्रतिदिन आने वाले ढाई हजार से ज्यादा मरीजों और उनके तीमारदारों के वाहनों के साथ डॉक्टर्स, मेडिकल स्टाफ और सरकारी एंबुलेंस को पार्क करने के लिए जगह की जरूरत है। परिसर में कोई रोक-टोक न होने के कारण ई-रिक्शा, ऑटो चालक व कई बार अन्य यात्री वाहन बेतरतीब ढंग से पार्क हो जाते थे। इससे परेशानी होती थी। इससे निपटने के लिए जम्मू कश्मीर बैंक द्वारा प्रदान की गई दस बैरिकेडिंग के माध्यम से अवैध पार्किंग को रोका जा रहा है।
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कोट
जिले के इस सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान में इस तरह की व्यवस्था बहुत पहले ही किए जाने की जरूरत थी। कई बार यहां वाहनों की इतनी भीड़ होती थी कि एंबुलेंस तक को निकलने के लिए जगह नहीं बचती थी। ऐसे में अगर अस्पताल प्रबंधन ने नई व्यवस्था शुरू की है तो वह सराहनीय है।
-अनुज भारती, स्थानीय युवा।
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जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में वाहनों की आए दिन होने वाली चोरी बड़ी समस्या है। इसके कारण लोग अपने वाहनों को सुरक्षित स्थान पर पार्क करते थे। अब नो एंट्री के चलते वाहनों की सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। अगर वाहनों को अंदर नही जाने दिया जा रहा है तो पार्किंग को सुरक्षित बनाया जाए।
-रवि हंस, स्थानीय निवासी
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जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में अवैध पार्किंग बड़ी समस्या है। इससे निपटने के लिए प्राथमिक स्तर पर बेरिकेंडिंग की गई है।विधानसभा चुनाव के लिए जारी आदर्श आचार संहिता के खत्म होने के बाद पार्किंग को अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे। इससे ही व्यवस्था में सुधार होगा।
-डॉ. सुरेंद्र कुमार अत्री, प्रधानाचार्य जीएमसी कठुआ।