कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट की अदालत ने टोके से हमला कर शिकायतकर्ता को घायल करने के मामले में आठ आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अदालत ने घटनास्थल, चोट लगने के तरीके और कथित हथियार के इस्तेमाल को लेकर गवाहों के बयानों में विरोधाभास को महत्वपूर्ण मानते हुए आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया गया।
मामले की सुनवाई गत 8 अक्तूबर को विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट अमनदीप कौर की अदालत में की गई। कोर्ट में दायर चालान के अनुसार शिकायतकर्ता अजय कुमार ने आरोप लगाया था कि 8 जुलाई 2016 की रात करीब नौ बजे जब वह अपने परिवार के साथ घर पर खाना खा रहा था, तभी आरोपी वहां पहुंचे और गाली-गलोज करने के बाद घर के बरामदे में घुसकर मारपीट करने लगे। आरोप था कि आरोपी डिंपल ने टोका से उसके सिर पर हमला किया, जिससे वह घायल हो गया। मामले में आरोप तय किए गए थे।
सुनवाई के दौरान घायल अजय कुमार ने अदालत में कहा कि आरोपियों के साथ झगड़ा और हाथापाई हुई थी, लेकिन उसे चोट गिरने के कारण लगी थी। उसने टोका से हमला किए जाने की बात से इनकार किया। उसने यह भी स्वीकार किया कि आरोपियों के साथ समझौता हो चुका है और वह मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। दूसरी ओर गवाह बलबीर कुमार और जोगिंदर पाल ने डिंपल के हाथ में टोका होने और अजय कुमार पर हमले की बात कही। हालांकि, बलबीर कुमार के बयान के अनुसार घटना मानके तालाब के चौक पर हुई थी, जबकि शिकायतकर्ता के बयान और अभियोजन की कहानी में घटनास्थल घर बताया गया था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मेडिकल रिपोर्ट विधिवत साबित नहीं की गई और जांच अधिकारी को भी अदालत में गवाही के लिए पेश नहीं किया गया। ऐसे में गवाहों के बयानों में मौजूद महत्वपूर्ण विरोधाभासों और जांच से जुड़ी कमियों का स्पष्टीकरण नहीं मिल सका। अभियोजन पक्ष को अतिरिक्त अवसर दिए जाने के बावजूद वह आगे कोई गवाह पेश नहीं कर पाया। लिहाजा कोर्ट ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया।