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Kathua News: मारपीट और रास्ता रोकने के मामले में आरोपी पांच साल बाद बरी

Tue, 26 May 2026 01:17 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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अदालत से
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- साल 2021 का महानपुर का मामला

संवाद न्यूज एजेंसी

कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट महानपुर ने पांच साल पुराने मारपीट, गाली-गलौज और रास्ता रोकने के मामले में आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शियों गवाहों और ठोस साक्ष्य से नहीं हो सकी। अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों में भी कई विरोधाभास पाए गए। लिहाजा आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए उसे बरी करने का फैसला सुनाया गया।

मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट कंगना गुप्ता की अदालत में की गई। कोर्ट में दायर चालान के अनुसार मामला 31 जनवरी 2021 का महानपुर का है। इसमें शिकायतकर्ता बाबू राम ने आरोप लगाया कि घटना के दिन वह सुबह साढ़े आठ बजे अपने खेतों की तरफ जा रहा था। इसी बीच आरोपी हंस राज ने उसका रास्ता रोका, गाली-गलौज की और मारपीट की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी ने उसके साथ हाथापाई की जिससे उसे चोटें आईं। शोर सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों ने बीच-बचाव किया था। पीड़ित की शिकायत और मामले की जांच के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर चालान को 26 फरवरी 2021 को कोर्ट में पेश किया। 24 मार्च को 2021 को आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताया और कोर्ट से मुकदमा चलाए जाने की गुहार लगाई। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने सात गवाहों को अदालत में पेश किया। शिकायतकर्ता बाबू राम ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके सिर पर गैंती से हमला किया था।
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प्रत्यक्षदर्शी गवाह प्रभात सिंह ने अदालत को बताया कि दोनों पक्ष केवल आपस में बहस कर रहे थे और उसके सामने कोई मारपीट नहीं हुई। दूसरे गवाह पवन कुमार ने भी अदालत में कहा कि उसने दोनों भाइयों को झगड़ते देखा लेकिन आरोपी ने हमला करते हुए नहीं देखा। सुनवाई के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच पैतृक जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। जांच अधिकारी ने भी अदालत में स्वीकार किया कि भूमि विवाद की बात सामने आई थी और मौके पर बुलाए गए कुछ स्थानीय लोगों ने किसी मारपीट से इनकार किया था। इसके अलावा मेडिकल रिपोर्ट पेश करने वाले चिकित्सक ने शिकायतकर्ता को साधारण चोटें होना बताया लेकिन अदालत ने पाया कि मेडिकल दस्तावेजों में चोटों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास सामने आए हैं। ऐसे में अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा। इसके बाद अदालत ने आरोपी को संदेह लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया और आरोपी के जमानती और निजी मुचलके को भी समाप्त करने के आदेश दिए।
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