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Kathua News: डेढ़ महीने में सिर्फ 29 फीसदी किशोरियों का हुआ टीकाकरण

Wed, 15 Apr 2026 01:30 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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चिह्नित 4583 किशोरियों में से 71 फीसदी अब भी एचपीवी से वंचित
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले में किशोरियों को ह्यूमन पैपिलोमावायरस (एचपीवी) से बचाने के लिए शुरू टीकाकरण अभियान गति नहीं पकड़ पा रहा है। अभियान शुरू हुए डेढ़ माह से अधिक का समय हो गया है लेकिन अब तक सिर्फ 29 फीसदी किशोरियों को ही वैक्सीन दी गई है। अभियान के लिए तीन माह की समय सीमा तय की गई है।

गत 28 फरवरी को स्वास्थ्य विभाग की ओर से शुरू किए गए अभियान के तहत 14 से 15 वर्ष की आयु की कुल 4,583 किशोरियों का टीकाकरण किया जाना था। इसके लिए जिले भर में कुल 27 स्वास्थ्य केंद्रों को नामित किया गया था,लेकिन अभी तक न तो सभी नामित केंद्रों पर टीकाकरण शुरू हो पाया है, जिसके कारण 71 फीसदी किशोरियां इस सुविधा से वंचित हैं। मेडिकल ब्लॉक स्तर पर देखे तो अबतक सबसे ज्यादा बनी ब्लॉक में कुल 260,बिलावर में 257, हीरानगर में 227, बसोहली में 219 और परोल ब्लॉक में 194 का ही टीकाकरण हुआ है, जोकि निर्धारित कुल संख्या का 1317 ही बनता है।
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स्वास्थ्य विभाग के जुड़े अधिकारियों के अनुसार, गत वर्ष जब यह वैक्सीन मार्किट में आई तो कई सारे लोगों ने बाजार से सात हजार की अधिक राशि से टीका खरीदकर अपने बेटियों को लगाया, लेकिन अब जब सरकार निशुल्क सुविधा उपलब्ध करवा रही है, तो अभिभावक किशोरियों के टीकाकरण के लिए आगे नहीं आ रही है। इस एक बड़ा कारण सोशल मीडिया पर टीकाकरण को लेकर भ्रांतियां हैं।

अपेक्षित परिणाम न मिलने के पीछे संभावित कारण
सूत्रों से मिली जानकारी के कई कारण हैं। इसमें सोशल मीडिया पर फैली भ्रांतियों के अलावा स्वास्थ्य विभाग की कई सारी कमियां हैं। पहला कारण जिले में कुल 53 पीएचसी है। इसमें से 40 स्वास्थ्य केंद्रों में कोई भी एमबीबीएस डॉक्टर की तैनाती नहीं है। इसके कारण दूरदराज और पहाड़ी इलाकों क्षेत्रों की किशोरियों को लंबी दूरी तय कर टीकाकरण के लिए जाना पड़ रहा है। दूसरा कारण संबंधित विभाग के पास पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध नहीं है और कई जागरूकता अभियान एक साथ चला रहा है। इसमें टीबी उन्मूलन, कृमि मुक्ति अभियान, डेंगू जागरूकता, नशा मुक्ति अभियान के चलते श्रमशक्ति में बंटवारा हो गया है। तीसरा लोगों में जागरूकता की कमी को माना जा रहा है, लेकिन जागरूकता के लिए भी संबंधित विभाग के पास पर्याप्त मैनपावर होना अनिवार्य होनी चाहिए।
कोट
जिले में चिह्नित किशोरियों का टीकाकरण करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है। अभियान की शुरुआत में स्कूलों में बोर्ड परीक्षाएं चल रही थी। इस कारण कम लड़किया सामने आई हैं। अब विभाग ने स्कूलों को खासकर ध्यान में रखकर रणनीति बनाई है ताकि निर्धारित लक्ष्य को पूरा किया जा सके। उम्मीद है कि अब अभियान में तेजी आएगी।
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- डॉ. वासना शर्मा, जिला टीकाकरण अधिकारी

कोट
हाल ही में जिला स्तर पर टीकाकरण अभियान को लेकर समीक्षा की गई है। इसमें कई सारे कारण सामने आए हैं। विभाग ने स्कूलों पर फोकस करने का निर्णय लिया है। उम्मीद है कि इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।

-डॉ. विजय रैना, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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