संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के कुल 51 सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूलों में विभिन्न विषयों के लेक्चरर के पद खाली हैं। इसमें सबसे ज्यादा प्रभावित पहाड़ी और दूरदराज के शिक्षा संस्थान हैं। शहरी और समतल इलाकों की तुलना में विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा है लेकिन व्याख्याताओं की संख्या बहुत कम है। यह पद समय-समय पर शिक्षा विभाग की ओर से किए गए तबादलों के चलते खाली होते गए लेकिन भरपाई कभी भी नहीं हुई। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार इन 51 सेकेंडरी स्कूलों के लिए कुल 648 व्याख्याताओं के पद स्वीकृत हैं। इसमें से 50 फीसदी (322) विभिन्न विषयों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। जिले भर में कई विषयों में स्थिति बेहद चिंताजनक है।
डोगरी और भूविज्ञान विषयों में शत-प्रतिशत पद खाली हैं। अर्थशास्त्र के 77, शिक्षा के 70, इतिहास के 67, हिंदी के 65 और राजनीति विज्ञान के 63 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। शिक्षकों का कहना है कि इस कमी के चलते विद्यार्थियों को नियमित कक्षाएं नहीं मिल पा रही हैं। शिक्षा विभाग समय-समय पर युक्तिकरण कर स्कूलों में पढ़ाने वाले स्नातकोत्तर शिक्षकों की तैनाती कर पाठ्यक्रम पूरा करवाने की कोशिश करता है लेकिन कई बार आधा शैक्षणिक सत्र बीत जाने के बाद विद्यार्थियों की विषय विशेष की पढ़ाई शुरू हो पाती है। शिक्षकों का आरोप है कि इससे कई बार सिर्फ खानापूर्ति होती है जिसका शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ रहा है। जनता के प्रतिनिधि कई बार विभिन्न मंचों से शिक्षा विभाग से लंबे समय से रिक्त पदों को भरने की मांग को दोहराते रहे हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावक का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण उनके परिणामों पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।