शिक्षा से वंचित हैं जिले के पहाड़ी क्षेत्र, सरकार पर अनदेखी का आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के पहाड़ी और दूरदराज क्षेत्रों में स्थित सरकारी स्कूलों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। बुनियादी सुविधाओं की कमी और शिक्षकों की भारी कमी के चलते छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। हालात इतने खराब हैं कि बनी विधानसभा क्षेत्र के 46 स्कूल मात्र एक-एक शिक्षक के भरोसे संचालित हो रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार विधानसभा के एक शिक्षक के सहारे चलने वाले ज्यादातर प्राइमरी स्कूल हंै। इसमें बनी शिक्षा जोन के कुल 19 जबकि मल्हार शिक्षा जोन के 27 स्कूल शामिल हैं। इनमें तैनात एकमात्र शिक्षक को ही सभी कक्षाओं को संभालना पड़ता है। शिक्षकों को पहली से लेकर पांचवीं तक की कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ पढ़ाना पड़ता है जिससे न तो विद्यार्थियों को उचित शिक्षा मिल पा रही है और न ही शिक्षक प्रभावी ढंग से पढ़ा पा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि इन स्कूलों में शिक्षक केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं बल्कि उन्हें स्कूल के अतिरिक्त कार्य भी संभालना पड़ता है। रिकॉर्ड मेंटेन करना, मिड-डे मील की व्यवस्था देखना और अन्य सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन भी उसी शिक्षक के जिम्मे है। इससे पढ़ाई का समय और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होते हैं।
इनमें से 12 स्कूल ऐसे हैं जिनकी इमारतें जर्जर हो चुकी हैं। कई स्कूलों में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है जबकि कुछ जगहों पर शौचालय तक नहीं हैं। जहां शौचालय बने भी हैं वहां पानी की कमी के कारण वे उपयोग के लायक नहीं रह गए हैं।
शिक्षा विभाग के दावे और जमीनी हकीकत
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी सिंगल टीचर स्कूल का शिक्षक छुट्टी पर जाता है, तो वह पहले आसपास के मिडिल स्कूल के हेडमास्टर को सूचना देता है और वहां दूसरे स्कूल से शिक्षक की व्यवस्था की जाती है। कई बार यह व्यवस्था मौखिक तौर पर की जाती है। अगर शिक्षक लंबे समय के लिए छुट्टी पर जा रहा है तो आदेश जारी कर युक्तिकरण के तहत व्यवस्था की जाती है। युक्तिकरण की व्यवस्था उन्हीं स्कूलों में होती है, जहां विद्यार्थी 20 से अधिक होते है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यवस्था कागजों तक ही सीमित है। दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में शायद ही कभी कोई वैकल्पिक शिक्षक समय पर पहुंच पाता है, जिससे कई बार स्कूल पूरी तरह से बंद ही रहते हैं।
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पहाड़ी क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में वर्तमान में शिक्षकों की बारी कमी है। पहाड़ी क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षक-विद्यार्थियों का अनुपात अनुपात 1:30 से 1:40 तक पहुंच चुका है। शिक्षक की कमी को लेकर समय-समय पर उच्चाधिकारियों को सूचित किया गया है। अगर किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 20 से अधिक है तो जोनल स्तर पर युक्तिकरण कर वहां एक अतिरिक्त शिक्षक की तैनाती की जाती है।
राम लाल, डिप्टी सीईओ