नगरी स्थित माता बाला सुंदरी का मंदिर परिसर। संवाद
1.95 करोड़ से बनेगी दो सराय, यात्रियों को मिलेगी ठहरने की बेहतर व्यवस्था
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। नगरी स्थित ऐरवां मंदिर और बाला सुंदरी माता मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए दो सराय बनाने की मंजूरी मिली है। सरकार की ओर से दोनों मंदिर परिसरों में लगभग 97-97 लाख रुपये की लागत से एक-एक सराय का निर्माण किया जाएगा। कुल मिलाकर इस परियोजना पर करीब 1.95 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इन सरायों के निर्माण से दूरदराज से आने वाले श्रद्धालुओं को रात्रि विश्राम की बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। विशेषकर मेलों और त्योहारों के दौरान यहां भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं जिसके चलते ठहरने और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी महसूस की जाती रही है। मंदिर कमेटियों की ओर से लंबे समय से सुविधाओं के विस्तार की मांग उठाई जा रही थी। त्योहारों के अवसर पर न केवल जम्मू-कश्मीर के विभिन्न जिलों से बल्कि पड़ोसी राज्यों पंजाब और हिमाचल प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन धार्मिक स्थलों पर पहुंचते हैं। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग को सौंपी गई है।
जानकारी के अनुसार प्रत्येक मंदिर परिसर में एक मंजिला इमारत का निर्माण होगा। इसमें दो बड़े-बड़े कक्षों के ऊपर एक बड़े से हॉल का निर्माण किया जाएगा। इस निर्माण कार्य को अगले छह महीनों के भीतर पूरा करने की योजना है। ऐरवां मंदिर कमेटी के प्रधान डॉ. हरि दत्त शिशु ने बताया कि इन सरायों का निर्माण होने से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि मंदिर कमेटी मंदिर परिसर में योग और ध्यान को लेकर नियमित सत्र शुरू करने की सोच रही है। इससे न केवल इन जगहों की धार्मिक महत्त्व बढ़ेगी बल्कि अधिक से अधिक लोगों को सनातन के साथ जोड़ने का भी प्रयास किया जाएगा। वहीं, मंदिर कमेटी की योजना है कि जहां आने वाले श्रद्धालुओं को सब्सिडाइज्ड फूड उपलब्ध करवाने पर काम किया जा रहा है।
कोट
दोनों धार्मिक स्थलों के परिसर में सराय के निर्माण की कवायद शुरू कर दी है। उम्मीद है कि जल्द निर्माण कार्य शुरू होगा। इसे अगले छह महीनों के भीतर पूरा करने की योजना है ताकि आगामी अक्टूबर माह में नवरात्र से पहले यात्रियों को और बेहतर सुविधाएं मिल सके।
-कुलदीप शर्मा, कनिष्ठ अभियंता लोक निर्माण विभाग
नगरी स्थित माता बाला सुंदरी का मंदिर परिसर। संवाद