कठुआ। पहाड़ी उपमंडल बसोहली में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के लिए बनाए गए 10 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) मात्र मरहम-पट्टी केंद्र बनकर रह गए हैं। पिछले दो सालों से इन पीएचसी में एक भी चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई हैं, जिसके कारण ग्रामीणों के इलाज के लिए उपजिला अस्पताल और ट्रामा सेंटर महानपुर पर निर्भर होना पड़ रहा है। जहां पहले से ही डाॅक्टरों और विशेषज्ञों की भारी कमी है।
जानकारी के अनुसार, ब्लॉक बसोहली में वर्तमान में छह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) और चार न्यू टाइप प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एनटीपीएचसी) स्थापित किए गए हैं। चिकित्सक की तैनाती एक में भी नहीं है। ये केंद्र फार्मासिस्ट अथवा कंपाउंडर के सहारे संचालित किए जा रहे हैं। लगभग 70 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इलाके और डेढ़ लाख से ज्यादा आबादी सिर्फ और सिर्फ उपजिला अस्पताल पर इलाज के लिए निर्भर है।
जानकारी के अनुसार मेडिकल ब्लॉक बसोहली में कुल 35 चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं। इसमें से 28 वर्तमान में खाली पड़े हुए हैं, जबकि सात चिकित्सा अधिकारियों की तैनाती उपजिला अस्पताल बसोहली और ट्रामा सेंटर महानपुर में है। यह दोनों अस्पताल विशेषज्ञों डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं। कई बार स्थानीय विधायक और लोग विभिन्न मंचों से सरकार से इन रिक्त पदों को भरने की मांग को दोहरा चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग है कि इसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इसका खमियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
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पीएचसी के सभी 17 पद रिक्त
वर्तमान में ब्लॉक बसोहली में छह पीएचसी ग्रामीण इलाके महानपुर, भूंड, साधंर, हट्ट, सन्नघाट और करणबाड़ा में स्थापित हैं। यहां प्रत्येक पीएचसी के लिए दो चिकित्सा अधिकारियों के पद स्वीकृत हैं। वहीं, चार एनटीपीएचसी पलासी के दो चिकित्सक, जबकि तीन अन्य के लिए कुल सात पद स्वीकृत किए गए हैं, लेकिन किसी भी पीएचसी में एक भी डॉक्टर नहीं है।
कोट
हाल ही में निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं जम्मू के बसोहली दौरे के दौरान डॉक्टरों की भारी कमी प्रमुखता से उठाई गई थी। उन्होंने रिक्त पदों का विस्तार से एक ब्योरा तैयार कर कार्यालय को भेजने के निर्देश दिए थे, ताकि सरकार से बातचीत कर खाली पदों को भरा जा सके।
-डॉ. रजनीश शर्मा, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी