कठुआ। जिले में बांस उत्पादों से स्थानीय बाजार तेजी से फल-फूल रहा है। सल्लन स्थित कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) से प्रशिक्षण प्राप्त ग्रामीण महिलाएं बांस शिल्प की कला सीखकर मात्र 100 रुपये के पेन स्टैंड से लेकर 15 हजार रुपये तक का सोफा सेट तैयार कर रही हैं। इससे न केवल ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को नई दिशा मिली है, बल्कि उनके द्वारा बनाए गए उत्पाद स्थानीय बाजारों में एक अलग पहचान भी बना रहे हैं। उधर, इसका बाजार भी सजने लगा है।
अब तक ग्रामीण स्तर पर बांस शिल्प से परंपरागत और चुनिंदा उत्पाद तैयार करने वाले शिल्पकार को सल्लन सीएफसी स्थापित होने से नई उम्मीद जगी है। हस्तशिल्प विभाग की ओर से उत्तर पूर्वी राज्य से विशेषज्ञ कारीगरों द्वारा ग्रामीण महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
सीएफसी सेंटर में 20 से अधिक महिलाएं न केवल विभिन्न कार्यालयों में बाहर लगने वाली नाम की पट्टी, फाइल ट्रे, पेन स्टैंड, टोकरी, बल्कि बांस से कुर्सी, मेज जहां तक की सोफासेट भी तैयार कर रही हैं। इनकी कीमत मात्र एक सौ रुपये से शुरू होकर 15 हजार तक हैं। वहीं, महिलाओं का कहना है कि पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं, लेकिन अब वे प्रशिक्षण प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। बांस से बने पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की मांग लगातार बाजार में बढ़ रही है। इससे न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है।
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तैयार उत्पाद को बेचने के लिए बाजार अभी भी सीमित
महिलाओं द्वारा बांस से तैयार उत्पादों की स्थानीय बाजार में खपत बड़ी ही कम है। इन तैयार उत्पादों को अधिक से अधिक लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए यह अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। हाल फिलहाल में सीएफसी सेंटर सल्लन में पहुंचे एसडीएम हीरानगर के समक्ष कारीगरों ने इस चुनौती को प्रमुखता से उठाया। इसके बाद सब डिवीजन अधिकारी ने कारीगरों को आश्वासन दिया कि तैयार उत्पादों को प्रचार प्रसार के लिए सबसे पहले सरकारी कार्यालयों को दिया जाएंगा। इसमें पेन स्टैंड, नाम की पट्टी, फाइल ट्रे शामिल है। इसके बाद इन उत्पादों को ज्यादा से ज्यादा बाजार उपलब्ध करवाने के लिए बड़े स्तर का सोशल मीडिया सहित अन्य प्लेटफार्मों का सहारा लिया जाएगा। इसके लिए जल्द रणनीति तैयार की जाएगी, ताकि तैयार उत्पाद को बेचने में आसानी हो।
कोट
सीएफसी सल्लन में प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी महिलाएं बांस से कई तरह के उत्पाद तैयार कर रही हैं। प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया लगातार जारी है। महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों के लिए बाजार अभी भी सीमित है, जोकि एक चुनौती है। इसके लिए हस्तशिल्प विभाग और जिला प्रशासन हर तरह का प्रयास कर रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा तैयार माल बाजार तक पहुंचा सकें।
-अभिषेक शर्मा, सहायक हस्तशिल्प प्रशिक्षण अधिकारी