कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार ने धोखाधड़ी कर बिना अनुमति यात्रियों को जम्मू-कश्मीर में प्रवेश कराने के दो आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी किया है। यह मामला पांच साल पूर्व कोरोना काल के दौरान लोगों को बिना पास और बिना कोविड टेस्ट के जम्मू कश्मीर में प्रवेश कराने और उनसे धन वसूलने से जुड़ा हुआ है।
आदेश के अनुसार अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। अदालत ने पाया कि न तो किसी यात्री का बयान दर्ज किया गया, जिससे साबित हो सके कि आरोपी उनसे धोखाधड़ी कर धन वसूल रहे थे। न ही अभियोजन पक्ष ने जिला मजिस्ट्रेट की कोई शिकायत प्रस्तुत की है, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपियों ने आईपीसी की धारा 188 का उल्लंघन किया था। इसके अलावा यह भी स्पष्ट नहीं हुआ है कि आरोपियों की गतिविधियों से उस समय कोरोना संक्रमण फैलने की संभावना बनी थी।
कोर्ट में पुलिस की ओर से दायर चालान के मुताबिक मामला जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर में 29 मार्च 2021 की रात 9 और साढ़े 9 बजे के बीच का है। पुलिस स्टेशन लखनपुर में सूचना मिली थी कि आरोपी अरुण बंसोत्रा और परवीन अहमद अपने-अपने वाहन से प्रदेश के बाहर से आ रहे मजदूरों को बिना पास और कोरोना टेस्ट कराए प्रदेश में प्रवेश दे रहे हैं। दोनों पर यह भी आरोप था कि उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा जारी आदेशों का उल्लंघन किया था, जिससे संक्रमण फैलने की आशंका थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके वाहन को जब्त किया था। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर मामले में चालान 28 जुलाई 2021 को कोर्ट में पेश किया था। आरोपियों के बयान 28 जून 2022 को दर्ज किए गए। इसमें पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ दर्ज आईपीसी 420 के आरोप हटा दिए। अपने बयान में आरोपियों ने खुद को बेगुनाह बताया और मुकदमा चलाए जाने का कोर्ट से आग्रह किया। इसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को मामले में गवाह प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। अभियोजन पक्ष द्वारा कुल आठ गवाहों में से छह गवाहों को प्रस्तुत किया गया, जिसमें ज्यादातर पुलिसकर्मी थे। कोर्ट ने गवाहों की गवाही में विरोधाभास पाया।
एक गवाह ने कहा कि पुलिस को गुप्त सूचना की बात कही, जबकि दूसरे ने नियमित जांच का उल्लेख किया जबकि अन्य एक गवाह के अनुसार यात्रियों की कोविड जांच हुई और वे निगेटिव पाए गए। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि किसी भी यात्री ने शिकायत नहीं की थी कि उनसे पैसे वसूले गए। इसके बाद अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया।