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Kathua News: हत्या मामले में आरोपी नौ साल बाद साक्ष्य के अभाव में बरी

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कठुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण पंडोह ने नौ साल पुराने हत्या मामले में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार, अभियोजन पक्ष हत्या के आरोप और मकसद को साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने आरोपी के खिलाफ तीन मुख्य आधार प्रस्तुत किए। इनमें हत्या का मकसद, आरोपी का स्वीकारोक्ति बयान और आखिर बार आरोपी और मृतक को एक साथ देखे जाने की कहानी प्रस्तुत की गई।
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मामले में अभियोजन पक्ष का दावा था कि आरोपी के मृतक की पत्नी के साथ अवैध संबंध थे। आरोपी ने मृतक को रास्ते से हटाने के इरादे से हत्या की थी। कोर्ट सुनवाई के दौरान अदालत ने हत्या के कथित मकसद की गहन समीक्षा की और पाया कि रिकॉर्ड में मौजूद गवाहों के बयानों से मृतक की पत्नी और आरोपी के बीच किसी ने भी अवैध संबंधों की पुष्टि नहीं की है। यहां तक कि शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस को दी गई प्रारंभिक शिकायत में भी केवल पुरानी रंजिश का जिक्र था। इसमें किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया गया था।

कोर्ट में दायर चार्जशीट के अनुसार मामला 2 फरवरी 2019 का है, जब मृतक का शव नाले में खून से लथपथ मिला था। इसके बाद पुलिस ने जांच के दौरान आरोपी मुनीष कुमार और सचिन कुमार को गिरफ्तार कर उनके बयान के आधार पर दोनों के खिलाफ आरपीसी की धारा 302 और 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर की गई थी।
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वहीं, आरोपी सचिन कुमार को पुलिस ने नाबालिग पाया और उसके खिलाफ किशोर न्याय बोर्ड में मुकदमा चलाया गया। पुलिस ने आरोपी मुनीष के खिलाफ चालान 3 मई 2019 को कोर्ट में पेश किया था। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने मृतक के सिर पर लकड़ी के तख्त से हमला किया था। जिसमें पीड़ित की मौके पर मौत हो गई थी। इसके बाद आरोपियों ने मृतक के शव को नाले में फेंक दिया था। अगले दिन पुलिस ने मृतक के शव को बरामद कर आरोपियों की गिरफ्तार की थी। आरोपी मुनीष कुमार के खिलाफ आरोप 27 सितंबर 2019 को तय किए गए थे। इसमें आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया था और मुकदमा चलाए जाने की मांग की गई। इसके बाद अभियोजन पक्ष ने मामले में कुल 22 गवाहों को पेश किया। कोर्ट गवाही में किसी भी गवाह ने पुलिस की कहानी का समर्थन नहीं किया। इसमें पुलिस ने कहा कि था कि आरोपी ने हत्या को इसलिए अंजाम दिया क्योंकि मृतक की पत्नी के साथ उसके अवैध संबंध थे। अदालत ने कहा कि अभियोजन ने शृंखलावार साक्ष्यों के आधार पर आरोप सिद्ध नहीं किए, ऐसे में दोष सिद्ध नहीं होता है। गवाहों के विरोधाभासी बयानों को देखते हुए आरोपी को बरी कर दिया गया।
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