फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kathua News: सड़क हादसे में युवक की मौत मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज

विज्ञापन
विज्ञापन
कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने एक आरोपी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। उस पर नगरी परोल पुल पर बीते 10 जनवरी को एक दर्दनाक सड़क हादसे और उसके बाद घायल युवक को इलाज न दिलाकर सुनसान जगह पर फेंक देने का आरोप है। अदालत ने कहा, आरोपी का यह कृत्य अमानवीय, क्रूर और आपराधिक मानसिकता को दर्शाता है। आरोपी ने घायल को 100 मीटर दूरी स्थित नगरी अस्पताल न ले जाकर घायल को 18 किलोमीटर दूर झाड़ियों में फेंक देने से उसके जीवन बचाने के अवसर को भी छीना लिया।
विज्ञापन


कोर्ट में दायर जमानत याचिका के अनुसार, आरोपी अर्जुन कुमार निवासी चक देसा चौधरी मढ़ीन पर आरोप है कि उसने बीते 10 जनवरी को साम के साढ़े सात बजे नगरी परोल पुल पर एक सफेद रंग की टाटा ऐस लोड कैरियर को लापरवाही से चलाते हुए एक मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। इसमें मोटर साइकिल सवार अर्जुन कुमार पुत्र गुलजार चंद निवासी मीरपुर जग्गो नगरी और उसके पीछे बैठे केवल सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। अर्जुन कुमार को सिर व पैर में चोटें आईं थी। आरोपी घायल अर्जुन कुमार को इलाज के लिए उपजिला अस्पताल नगरी ले जाने की बजाय किसी अन्य जगह पर ले गया और घटनास्थल से 18 किलोमीटर दूर राजबाग क्षेत्र में झाड़ियों में फेंक दिया गया। इससे घायल की मौत हो गई। आरोपी के वकील ने कोर्ट में जमानत अर्जी दायर कर उसकी जमानत की मांग की। कहा कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपी से पुलिस ने कोई बरामदगी करना बाकी नहीं है। लिहाजा आरोपी को पुलिस हिरासत में रखने की जरूरत नही है और उसकी जमानत का कोर्ट से अनुरोध किया गया। इसका अभियोजन पक्ष की ओर विरोध किया गया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी एक जघन्य अपराध में शामिल है। इसमें दस साल की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
उन्होंने कहा कि इसका ट्रायल सेशन कोर्ट में होना है। इसलिए आरोपी इस कोर्ट से जमानत का दावा नहीं कर सकता। आरोपी व्यक्ति के कृत्य ने एक व्यक्ति की कीमती जान ले ली। घायल को बचाया जा सकता था अगर उसे समय पर अस्पताल पहुंच जाता। सरकारी वकील ने कहा कि पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी की तरफ से घायल को झाड़ियों में फेंकने के बाद अपने वाहन को साफ करवाना और टूटे बंपर को बदलवाना उसकी आपराधिक मानसिकता को दर्शाती है। इसके बाद सरकारी वकील ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करने की अपील की। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्ष को विस्तार से सुनने के बाद कहा कि आरोपी ने घायल को अस्पताल न ले जाकर पीड़ित का जीवन बचाने का अवसर छीना है। इसके साथ ही आरोपी ने सबूत मिटाने की कोशिश की। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी की फरार होने की संभावना को देखते हुए कहा कि आरोपी को जमानत देने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। लिहाजा कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका को खारिज करने का फैसला सुनाया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें