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Kathua News: लापरवाही से वाहन चलाने से हुई मौत मामले में आरोपी साक्ष्यों के अभाव में बरी

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कठुआ। जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट ने लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने से हुई मौत मामले में आरोपी को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। आदेश के अनुसार, अभियोजन पक्ष आरोपी पर लगे आरोप साबित करने में असफल रहा है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई पूर्ववर्ती फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि केवल तेज गति से वाहन चलाना अपने आपने आप में लापरवाह या लापरवाहीपूर्ण ड्राइविंग का प्रमाण नहीं है। लिहाजा अभियोजन पक्ष को आरोपी की लापरवाही को सबूतों के आधार पर सिद्ध करना होता है। इसके अलावा कोर्ट ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास और अस्पष्टता के कारण आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया है।
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कोर्ट में दायर चालान के अनुसार दुर्घटना 15 अक्तूबर 2020 की रात लगभग 9 बजकर 45 मिनट पर घटी थी। इसमें आरोपी वरुण छाबड़ा निवासी लुधियाना पर आरोप था कि दुर्घटना के समय वह वाहन (पीबी10डीएक्स-7111) को लापरवाही और तेज गति से चला रहा था। चालान के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्ग जम्मू-पठानकोट स्थित रेलवे स्टेशन मोड़ में एक राहगीर को टक्कर मार दी। इसमें आशीष कुमार निवासी सुजानपुर पंजाब गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल को पुलिस ने जीएमसी कठुआ पहुंचाया गया। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया गया। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 279 और 304-ए के तहत मामला दर्ज कर चालान 13 जुलाई 2021 को कोर्ट में प्रस्तुत किया। 25 अक्तूबर 2021 को आरोपी के सीआरपीसी की धारा 251 के तहत बयान दर्ज किए गए। इसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को मामले में साक्ष्य प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 16 गवाहों में से पांच को अदालत में पेश किया। दो प्रत्यक्षदर्शी गवाहों ने अपने बयान में कहा कि वाहन तेज गति से चल रहा था और आरोपी को टक्कर मारने के बाद मौके से भागने की कोशिश की थी। वहीं, मामले में जांच अधिकारी ने जांच रिपोर्ट पेश की और बताया कि वाहन तेज गति में था तथा आरोपी ने नियंत्रण खो दिया। इसके कारण दुर्घटना हुई थी जबकि अन्य गवाहों ने वाहन की जब्ती और मैकेनिकल जांच से जुड़े बयान दिए। बचाव पक्ष के वकील ने गवाहों के बयानों में विरोधाभासों की ओर ध्यान दिलाया। आरोपी के वकील ने बताया कि गवाहों के अनुसार वाहन के तेज गति का उल्लेख किया गया है। लेकिन गति कितनी थी या वाहन किस तरह चलाया जा रहा था। इसका कोई ठोस विवरण नहीं है। बताया कि गवाहों के बयान में मृतक का नाम आकाश और आशीष दोनों तरह से दर्ज हुआ। इससे विश्वसनीयता पर प्रश्न उठता है और दुर्घटना रात के समय होने पर गवाहों द्वारा आरोपी की पहचान स्पष्ट न कर पाने को भी बचाव पक्ष ने अहम तर्क बनाया। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद कहा कि धारा 279 और 304-ए के तहत दोषसिद्धि के लिए रैश ड्राइविंग का ठोस प्रमाण होना आवश्यक है। जो मामले में अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत नहीं किया जा सका। लिहाजा कोर्ट ने आरोपी को बरी करने का फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि आरोपी के जमानती और व्यक्तिगत बांड छह महीने तक प्रभावी रहेंगे और मामले में जब्त प्रॉपटी अपील अवधि समाप्त होने के बाद स्थायी रूप से सुपुर्द की जाएगी।
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