कठुआ। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने नौ साल पुराने शहर के वार्ड 8 में चोरी के मामले में आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। आदेश के अनुसार कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता और गवाहों के बयान विरोधाभासी हैं। चोरी की गई चीजों की बरामदगी के समय पुलिस की तरफ से कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था। इसके अलावा कोर्ट ने माना कि पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज करने में आठ दिन की देरी की है। इसका पुलिस और अभियोजन पक्ष के पास कोई संतोषजनक कारण नहीं दिया गया है। इसके बाद अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए मामले से बरी कर उसके जमानती व व्यक्तिगत बांड को खारिज करने का आदेश दिया।
कोर्ट में पुलिस की ओर से दायर चालान के अनुसार चोरी के मामले में आरोपी दविंद्र कुमार निवासी वार्ड एक पर आरोप था कि उसने शहर के वार्ड आठ की एक किराने की दुकान पर चोरी को अंजाम दिया था। दुकानदार जसवंत राज ने अपनी शिकायत में पलिस को बताया कि आरोपी ने उसकी दुकान से एक गैस सिलिंडर, तेल का टिन, मोबाइल फोन, माजा की पेटी और लगभग सात हजार रुपये की नकदी चोरी की थी। इसके बाद पुलिस ने अपनी जांच में आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर कुछ चोरी के सामान की बरामदगी भी की थी। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर मामले में चालान 15 जुलाई 2016 को अदालत में प्रस्तुत किया। आरोपी के खिलाफ आरोप 24 जनवरी 2017 को तय किए गए थे। इसमें आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाए जाने की वकालत की थी। इसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को मामले में सबूत पेश करने के निर्देश दिए थे। अभियोजन पक्ष ने छह गवाहों में तीन को कोर्ट में गवाही के लिए प्रस्तुत किया। पीड़ित जसवंत राज ने अदालत में कहा कि मोबाइल फोन वास्तव में उनके घर की छत पर तकिये के नीचे रखा था। शिकायत में इसे दुकान से चोरी हुआ बताया गया था। वहीं, पीड़ित के भाई ने बयान दिया कि आरोपी ने पुलिस पूछताछ में चोरी स्वीकार की थी लेकिन उसके बयान की तारीख और परिस्थितियों में विरोधाभास सामने आया। वहीं मामले में जांच अधिकारी ने बताया कि बरामदगी आरोपी के इशारे पर हुई थी लेकिन स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं थे। इसके बाद अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी का दोष साबित करने में असफल रहा है।