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Kathua News: तेजधार हथियार से हमला करने के मामले में आरोपी बरी

Thu, 08 Jan 2026 12:13 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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- वर्ष 2016 का है मामला, आरोपी पर कुल्हाड़ी से हमला करने का था केस
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कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने वर्ष 2016 के तेजधार हथियार से हमला कर शिकायतकर्ता को जख्मी करने के मामले में आरोपी को बरी कर दिया है। मामले में आरोपी पर कुल्हाड़ी से अपने ही चाचा को जख्मी करने का आरोप था। आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है। इसके बाद अदालत ने आरोपी के जमानती व व्यक्तिगत बांड को समाप्त कर मामले का निपटारा कर दिया।


कोर्ट में दायर चालान के अनुसार मामला 9 मार्च 2016 का जखबड़ इलाके का है। इसमें पीडि़त की पत्नी निर्मला देवी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई कि आरोपी प्रदीप सिंह जो उसके पति का भतीजा है। घटना के दिन आरोपी हाथ में कुल्हाड़ी लेकर हवेली में घुस आया और उनके पति पर हमला कर दिया। घायल को तत्काल अस्पताल ले जाया गया जिसके बाद इसकी शिकायत पुलिस में की गई और पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 451, 323 और 324 के तहत मामला दर्ज कर चालान को कोर्ट में 30 मार्च 2016 को पेश किया गया था।
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आरोपी के खिलाफ 11 जुलाई 2016 को आरोप तय किए गए थे जिसमें आरोपी ने खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाए जाने की मांग की। इसके बाद कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को मामले में गवाहों को पेश करने का निर्देश दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल पांच गवाहों में चार की गवाही कोर्ट में करवाई गई। इसमें पीड़ित खुद और उसकी पत्नी (शिकायतकर्ता) के अलावा डॉक्टर और जांच अधिकारी ने गवाही दी। पीड़ित की पत्नी ने अदालत में कहा कि उसने खुद आरोपी को अपने पति पर वार करते देखा था। पीड़ित ने भी हमले की पुष्टि की और बताया कि पुलिस ने खून से सनी शर्ट व तौलिया जब्त किया था। मेडिकल ऑफिसर ने रिपोर्ट में सिर पर गहरी चोट दर्ज की लेकिन यह भी कहा कि चोट गिरने से भी हो सकती है। जबकि मामले में जांच अधिकारी ने माना कि आरोपी और पीड़ित परिवार के बीच जमीन को लेकर पुराना विवाद था।
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बचाव पक्ष द्वारा आरोपी के बचाव में भी एक गवाही करवाई गई। जिसमें उसने कहा कि घटना वाले दिन पीड़ित चक्कर आने से गिर पड़े थे और उसे चोट लगी थी। आरोपी उस समय ड्यूटी पर था और मौके पर मौजूद नहीं था। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि मामले में गवाह केवल पति और पत्नी है और पुलिस द्वारा एक भी स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जांच अधिकारी ने भी स्वीकार किया कि जमीन विवाद था जबकि पीड़ित पक्ष ने विवाद को नकारा दिया था। इसके अलावा हमले में इस्तेमाल कथित हथियार (कुल्हाड़ी) आरोपी ने खुद पुलिस को सौंपी थी, जिसे डॉक्टर को दिखाया ही नहीं गया और पुलिस ने मौके पर खून के नमूने या अन्य सबूत जब्त नहीं किए गए। डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि चोट गिरने से भी संभव है। इसके बाद अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का फैसला सुनाया गया। उन्होंने कहा कि जांच में गंभीर खामियां सामने आई हैं और अदालत ने साफ किया कि केवल संदेह या रिश्तेदार गवाहों के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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