कठुआ। जिला न्यायिक मोबाइल मजिस्ट्रेट (ट्रैफिक) ने आठ साल पुराने लापरवाही और तेज गति से वाहन चलाने से हुई दुर्घटना मामले में आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। आदेश के अनुसार अभियोजन पक्ष आरोपी के अपराध को साबित करने में असफल रहा है। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में आई चोटों से आरोपी की लापरवाही और तेज गति से वाहन चालने का अपराध साबित नहीं होता है।
कोर्ट में दायर चालान के अनुसार मामला 5 मई 2017 का लखनपुर इलाके का है। मामले में आरोपी प्रकाश सिंह पुत्र लाल सिंह निवासी धन्ना कठुआ पर आरोप है कि घटना के दिन वह अपना वाहन पंजीकरण जेके08सी -4072 को तेज और लापरवाह तरीके से चलाते हुए सेना के वाहन को टक्कर मार दी थी। इसमें सेना के वाहन का चालक गंभीर रूप से घायल हो गया था। घायल चालक को उपचार के लिए जिला अस्पताल कठुआ में भर्ती करवाया गया। इसके बाद लखनपुर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आरपीसी की धारा 279, 337 और 338 के तहत मामला दर्ज कर चालान को 11 जुलाई 2017 को कोर्ट में प्रस्तुत किया गया था। आरोपी ने कोर्ट में खुद को निर्दोष बताया और मुकदमा चलाए जाने की वकालत की थी। इसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को मामले गवाह पेश करने का निर्देश दिया था। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 में से 6 गवाहों को अदालत में पेश किया गया। इसमें एक प्रत्यक्षदर्शी गवाह भी मौजूद था। मामले में एकमात्र प्रत्यक्षदर्शी ने बयान में कहा कि वह घटना के 10 से 15 मिनट बाद मौके पर पहुंचा था और यह नहीं बता सका कि दुर्घटना किसकी लापरवाही से हुई थी। इसके अलावा डॉक्टर सहित अन्य पुलिसकर्मी की गवाहियां भी अभियोजन पक्ष की कहानी को मजबूती नहीं दे पाए। अभियोजन पक्ष ने कई बार अतिरिक्त गवाह पेश करने की कोशिश की, लेकिन बयानों में विरोधाभास और स्पष्ट सबूतों की कमी रही। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों को विस्तार से सुनने के बाद कहा कि आरपीसी की धारा 279 के तहत लापरवाह ड्राइविंग साबित करना अनिवार्य है, तभी आरपीसी की धारा 337 और 338 के तहत साधारण व गंभीर चोट लागू हो सकती हैं।
अभियोजन पक्ष लापरवाह ड्राइविंग साबित करने में असफल रहा इसलिए चोटों को भी आरोपी की लापरवाही से जोड़ना संभव नहीं होगा। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को आरोपमुक्त कर दिया गया।