कठुआ। घाटी औद्योगिक क्षेत्र से लगने वाले रास्तों को बंद करने पहुंची सिडको की टीम को स्थानीय लोगों का विरोध झेलना पड़ा। शुक्रवार को स्थानीय लोगों ने सिडकों की कार्रवाई पर कड़ा एतराज जाहिर कर उनके पारंपरिक रास्ते बंद किए जाने पर कड़ा विरोध किया। इसके चलते सिडको अधिकारियों को खाली हाथ लौटना पड़ा। स्थानीय लोगों का मानना है कि औद्योगिक क्षेत्र की चहारदीवारी करने से उनके पारंपरिक रास्ते बंद हो जाएंगे। इसका सीधा असर उनकी आजीविका पर पड़ेगा। लिहाजा उनको अपनी जमीनों में जाने के रास्ते बंद नहीं होने चाहिए।
नन्नन पंचायत की पूर्व सरपंच वंदना देवी ने बताया कि पिछले कई दशकों से स्थानीय लोग इन्हीं रास्तों का इस्तेमाल अपनी जमीनों में जाने के लिए करते है। वर्ष 2002 में सिडको ने नन्नन कालना की लगभग सात हजार एकड़ भूमि का अधिग्रहण कर औद्योगिक इकाइयों को सौंपी थी। इसके बाद लोगों ने औद्योगिक क्षेत्र के उस पार जमीनों में जाने के लिए रास्ते की मांग की थी। इसके बाद सिडको ने वहां गेट लगाकर आवाजाही बहाल की थी, लेकिन पिछले कुछ समय से सिडको इन रास्तों को बंद कर रही है, जिसको लेकर स्थानीय लोग इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर नन्नन, पंदराड सहित चार अन्य रास्ते बंद हो गए तो स्थानीय लोगों को अपनी चंग स्थित खेती वाली जमीनों में जाने के लिए वाया बरनोटी, सक्त्ता चक जाने के लिए 22 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी।
वहीं, पंदराड निवासी राम शरण शर्मा सहित मनोहर लाल, कालीदास, दीपक सिंह, अरुण कुमार और विनोद सिंह का कहना है कि कई दशकों से लोग इन रास्तों से जा रहे हैं। ऐसे में अगर सिडको चहारदीवारी के नाम पर इन मार्गों को बंद कर देगी तो इसका नुकसान स्थानीय लोगों को उठाना पड़ेगा। लिहाजा उनकी सरकार से मांग है कि इन रास्तों को बंद न किया जाए। उन्होंने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर और कर्मचारी सहित बरवाल से लकर बुद्धि, सौंथल, मैरथा पंचायत के लोग अपनी जमीनों में जाने के लिए इन रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। औद्योगिक क्षेत्र स्थापित होने से लोगों को लगा था कि स्थानीय युवाओं को रोजगार मुहैया होगा, लेकिन न केवल हमार रास्ता छीन रहे हैं, बल्कि औद्योगिक क्षेत्र के साथ लगती जमीनों से कनेक्टिविटी भी खत्म कर रहे हैं। लिहाजा ऐसा वे होने नहीं देंगे।