कठुआ। न्यायिक मजिस्ट्रेट हीरानगर ने धोखाधड़ी मामले में आरोपी को सशर्त जमानत दी है। आदेश के अनुसार, आरोपी को जमानत के लिए 40 हजार राशि का जमानत बांड कोर्ट के समक्ष और समान राशि का व्यक्तिगत बांड जिला जेल प्रभारी के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा आरोपी को कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना न्यायालय के अधिकार क्षेत्र को नहीं छोड़ने को कहा है। किसी भी तरीके से अभियोजन पक्ष के गवाहों और साक्ष्य को प्रभावित नहीं करने का आदेश दिया गया है।
कोर्ट में पुलिस की ओर दायर रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी विशाल वोहरा निवासी हीरानगर पर आरोप है कि उसने वर्ष 2022 में आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी की है। इसके बाद शिकायतकर्ता की शिकायत के बाद हीरानगर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की थी। गत अप्रैल महीने में आरोपी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। इसके बाद आरोपी के वकील ने कोर्ट में जमानत याचिका दायर कर अनुरोध किया कि उसका मुव्वकिल निर्दोष है और पुलिस ने उसे झूठे मामले में फंसाया है। जिसका अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध किया गया। अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस रिपोर्ट के अनुसार आरोपी ने आईपीसी की धारा 420 आईपीसी के तहत अपराध किया है। उसके खिलाफ पुलिस स्टेशन हीरानगर के एफआईआर नंबर 94/2022 में मामला दर्ज है। कहा कि मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है और कुछ गवाहों के बयान दर्ज किए जाने अभी बाकी हैं और अगर इस स्तर पर आरोपी को जमानत दी जाती है तो वह सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। लिहाज उसकी जमानत पर रोक लगाई जाए। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि आरोपी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है और आवेदकों के खिलाफ लगाए गए आरोप मृत्यु या आजीवन कारावास से दंडनीय नहीं हैं और इस तरह सीआरपीसी की धारा 437 के तहत परिकल्पित प्रतिबंध वर्तमान मामले में लागू नहीं होता है। जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है। इसके बाद अदालत ने आरोपी को सशर्त जमानत सुनाई।