कठुआ। जिले भर की सड़कों पर अनफिट वाहन मौत बनकर दौड़ रहे हैं। इसमें ज्यादातर मालवाहक, यात्री बस के अलावा स्कूली बस और निजी वाहन भी शामिल हैं। इनकी संख्या 3348 बताई जा रही है। यह वाहन पिछले कई सालों से बिना वैध फिटनेस प्रमाण पत्र के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इससे न केवल सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान हो रहा है, बल्कि इससे सड़क दुर्घटनाओं के बाद वाहन मालिकों और दुर्घटना का शिकार हुए लोगों को बीमा का लाभ भी नहीं मिल पाता है।
बिना वैध फिटनेस के चलने वालों वाहनों में ज्यादातर संख्या मालवाहक की है, जो 50 प्रतिशत से ज्यादा है। इसके बाद यात्री बस की है। निजी स्कूलों बसों की संख्या भी सैकड़ों में है, जो बिना वैध फिटनेस के स्कूली बच्चों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। मामले में परिवहन विभाग अब सख्ती के मूड में है। इन वाहनों के चालकों को दस दिन के भीतर वाहनों का फिटनेस सुनिश्चित करवाने के निर्देश दिए गए हैं। अन्यथा उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। विभाग का दावा है कि दस दिन के भीतर फिटनेस हासिल न करने वाले वाहनों को ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।
सरकारी विभाग भी चला रहे हैं बिन फिटनेस के वाहन
आरटीओ की ओर जारी सूची के मुताबिक, बिना फिटनेस वाहनों का संचालन करने में सरकारी विभाग भी पीछे नहीं है। इसमें जिले के दो राजकीय डिग्री कॉलेज की बसों के पास भी वैध फिटनेस प्रमाण पत्र नहीं है। इसके अलावा जलशक्ति विभाग के तीन मालवाहक, एनएचपीसी सेवा प्रोजेक्ट का एक मालवाहक, वन विभाग के दो, पुलिस की पांच बसें, दो मालवाहक और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के मालवाहक शामिल हैं।
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फिटनेस के लिए इन बिंदुओं की होती है जांच
फिटनेस प्रदान करने के लिए मोटर वाहन विभाग के अधिकारी जांच के दौरान वाहन की इन चीजों पर खास ध्यान देते हैं। इसके बाद ही फिटनेस दिया जाता है। इसमें ब्रेक, हार्न, वाइपर, इंडिकेटर, साफ-सफाई, प्रदूषण, स्टियरिंग, लाइट, ढांचा (लंबाई व चौड़ाई), वाहन चलने लायक है कि नहीं, चेसिस, बाॅडी, इंजन, स्पीडोमीटर, गियर, टायर, शीशा, इलेक्ट्रिकल (वायरिंग), डेंट-पेंट, नंबर प्लेट के अलावा टैक्स और बीमा की भी जांच होती है।