महिला संचालित जिले के पहले रेस्त्रां में मिलेगा पारंपरिक घर जैसा खाना
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत इसी सप्ताह होगा सक्रिय
जिले में बढ़ते औद्योगिकीकरण के बीच टिफिन सेवा भी उपलब्ध करवाएगा
पंकज मिश्रा
कठुआ। शहर के कॉलेज मार्ग पर महिलाओं की ओर से चलाया जाने वाला जिले का पहला रेस्त्रां जल्द शुरू होने जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में कठुआ जिले में यह पहल सामने आई है। एकता क्लस्टर से जुड़ी पांच महिलाएं मिलकर जिले का पहला महिला संचालित रेस्त्रां शुरू करेंगी।
उम्मीद का जायका नाम से शुरू होने वाला यह रेस्त्रां महिलाओं की आत्मनिर्भरता के साथ-साथ पारंपरिक खानपान का केंद्र बनेगा। खास तौर से सरकारी दफ्तरों, औद्योगिक क्षेत्रों के लिए यहां से टिफिन सर्विस शुरू करने को लेकर भी योजना बनाई गई है। कठुआ शहर में स्थित बीडीओ कार्यालय परिसर में शुरू होने जा रहे इस रेस्त्रां की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सप्ताह भर में इसका विधिवत शुभारंभ किया जाएगा। महिलाओं का कहना है कि यह केवल एक रेस्त्रां नहीं बल्कि उनके सपनों, संघर्ष और आत्मविश्वास का प्रतीक होगा। महिलाओं ने बताया कि रेस्त्रां के नाम उम्मीद का जायका के पीछे एक विशेष सोच जुड़ी हुई है। यह नाम उनके संघर्ष, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने की उम्मीद को दर्शाता है। यह रेस्त्रां केवल एक व्यवसाय नहीं बल्कि महिलाओं के सपनों को नई उड़ान देने का माध्यम बनेगा।
जानकारी के अनुसार बीडीओ कार्यालय परिसर में पहले स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक वस्तुओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक डिमॉन्स्ट्रेशन सेंटर स्थापित किया गया था। कुछ समय तक संचालन के बाद यह केंद्र बंद हो गया और लंबे समय से निष्क्रिय पड़ा था। अब एनआरएलएम के तहत इसका जीर्णोद्धार कर इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस महिला संचालित रेस्त्रां के रूप में विकसित किया गया है।
स्वच्छ, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाएगा
रेस्त्रां से जुड़ी आरती देवी ने बताया कि उम्मीद का जायका अपनी तरह का पहला ऐसा रेस्त्रां होगा जिसका संचालन पूरी तरह महिलाओं की ओर से किया जाएगा। यहां आने वाले ग्राहकों को स्वच्छ, पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही पारंपरिक डोगरा व्यंजनों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। रेस्त्रां में सुबह के नाश्ते से लेकर रात के भोजन तक की व्यवस्था होगी। इसके लिए विस्तृत मेन्यू तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द सार्वजनिक किया जाएगा। मेन्यू में राजमा-चावल, अम्बल, मदरा सहित कई पारंपरिक डोगरा व्यंजन शामिल किए जाएंगे। इसके अलावा ग्राहकों की पसंद को ध्यान में रखते हुए अन्य खाद्य पदार्थ भी उपलब्ध रहेंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में लोग तेजी से फास्ट फूड और बाहरी खानपान की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे पारंपरिक व्यंजनों की पहचान धीरे-धीरे कम होती जा रही है। ऐसे में यह रेस्त्रां डोगरा खानपान को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास करेगा। उन्होंने कहा कि यहां परोसे जाने वाले सभी व्यंजन स्वच्छता और गुणवत्ता के मानकों के अनुरूप तैयार किए जाएंगे। रेस्त्रां से जुड़ी अन्य महिलाओं ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज में महिलाओं की क्षमता और आत्मविश्वास को स्थापित करना भी है। उम्मीद का जायका इसी सकारात्मक बदलाव की एक मिसाल बनेगा।
वर्जन
उम्मीद के तहत स्वयं सहायता समूहों को इस तरह के उद्यम में सहयोग किया जा रहा है। कठुआ में खरोट के एक समूह को इसमें शामिल किया गया है। यह बीडीओ कार्यालय के पास कॉलेज मार्ग पर जिले का पहला महिलाओं की ओर से संचालित रेस्त्रां चलाएंगी। यहां घर की तरह मिलेगा खाना। टिफिन सर्विस भी दी जाएंगी। आउटलेट भी होगी। रेट भी काफी कम होगा।
- जमशीद आलम वानी, ब्लॉक कार्यक्रम प्रबंधक कठुआ
प्रदेश के सभी जिलों में महिलाओं के नेतृत्व वाले ऐसे उद्यम खोले जा रहे हैं। यह केंद्र महिलाओं को सशक्त करने के साथ ही उनकी आय को भी बढ़ाएंगे। कई जिलों में इसी सक्रिय कर दिया गया है और जल्द कठुआ में भी यह केंद्र सक्रिय हो जाएगा। इन महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षण दिया गया है कि गुणवत्ता का ख्याल कैसे रखना है और कितना खाना, कैसे तैयार किया जाना है।
डाॅ.शुभ्रा शर्मा, प्रबंध निदेशक, एनआरएलएम, जम्मू कश्मीर