संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला प्रशासन ने कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के उद्देश्य से सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। जिला मजिस्ट्रेट कठुआ राजेश शर्मा ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 के तहत एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए इंटरनेट मीडिया पर भड़काऊ, आपत्तिजनक और भ्रामक सामग्री के प्रसार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
आदेश में कहा गया है कि कठुआ जिला विभिन्न धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों का संगम है, जहां शांति और भाईचारा बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। हाल के समय में व्हाट्सएप, फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का दुरुपयोग कर भड़काऊ और झूठी सामग्री फैलाने के मामलों में वृद्धि हुई है। ऐसी गतिविधियां न केवल सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करती हैं बल्कि सांप्रदायिक तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी बिगाड़ सकती हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया पर ऐसा कोई भी टेक्स्ट, फोटो, वीडियो, आडियो या मीम साझा नहीं करेगा, जिससे किसी धर्म, जाति, समुदाय या क्षेत्र विशेष के बीच नफरत या विवाद उत्पन्न हो।
इसके अतिरिक्त फर्जी खबरें फैलाना, मनगढ़ंत या भ्रामक जानकारी प्रसारित करना तथा छेड़छाड़ की गई तस्वीरें या वीडियो साझा करना भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से किसी समुदाय के खिलाफ बहिष्कार का आह्वान करना, किसी व्यक्ति या समूह को धमकी देना या हिंसा के लिए उकसाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आएगा। इसके साथ ही इंटरनेट मीडिया के जरिए अवैध सभा, जुलूस या भीड़ को संगठित करने का प्रयास भी कानूनन अपराध माना जाएगा।
जिला मजिस्ट्रेट ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की भड़काऊ, संदिग्ध या अप्रमाणित सामग्री को आगे साझा करने से बचें। यदि ऐसी कोई सामग्री सामने आती है तो इसकी सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर क्राइम यूनिट को दी जाए। इससे समय रहते कार्रवाई कर संभावित तनाव को रोका जा सकता है। सोशल मीडिया ग्रुप्स के एडमिन और माडरेटर की जिम्मेदारी भी तय की गई है। उन्हें निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने प्लेटफार्म पर आपत्तिजनक या भड़काऊ सामग्री को प्रसारित होने से रोकें। यदि वे ऐसा करने में विफल रहते हैं, तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। आदेश के उल्लंघन पर कड़ी सजा का प्रावधान रखा गया है।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और बीएनएसएस की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर तीन वर्ष से लेकर सात वर्ष तक की सजा और जुर्माना लगाया जा सकता है। जिला मजिस्ट्रेट ने जनता से सहयोग की अपील की है।