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Kathua News: बिलावर को जिला बनाने का कोई प्रस्ताव नहीं

Tue, 31 Mar 2026 01:42 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कठुआ
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प्रदेश सरकार ने बिलावर विधायक के पूछे सवाल पर दिया जवाब
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संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिले के तीन पहाड़ी सब डिवीजन को मिलाकर अलग से जिला बनाने को लेकर फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। जम्मू कश्मीर सरकार ने बिलावर विधायक सतीश शर्मा की ओर से पूछे गए सवाल पर यह साफ किया है। बिलावर और बसोहली जहां पहले ही प्रशासनिक इकाईयों का मुख्यालय यहां स्थापित किए जाने की मांग करते रहे हैं। वहीं बनी भी अब दौड़ में शामिल हो चुका है।
दरअसल हाल फिलहाल में एक बार फिर प्रदेश में नए जिलों के गठन को लेकर चर्चाओं का बाजार गरम हो चुका है। इस बीच बिलावर और बसोहली के लोग भी मुखर हो गए हैं। इससे पहले सरकार इस क्षेत्र की मांग को देखते हुए सब डिवीजन के इन दोनों ही मुख्यालयों को अतिरिक्त जिले के रूप में घोषित कर एक एक एडीसी का पद भी दे चुकी है। लोक निर्माण विभाग और वन विभाग का अलग से डिवीजन इस इलाके में चलता है। ऐसे में जिला कठुआ के पहाड़ी क्षेत्र की नए जिले में रूपरेखा बांधने का काम चलता रहा है। फिलहाल सरकार के लिखित में दिए जवाब में यह साफ हो चुका है कि ऐसा कोई भी प्रस्ताव सरकार की ओर से विचाराधीन नहीं है। सरकार ने यह भी बताया कि मंडलायुक्त जम्मू ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिलावर के लिए जिले की मांग होती रही है।
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6 तहसीलों के मध्य में बिलावर, सही दावेदार
बिलावर जिला आंदोलन कमेटी ने समय-समय पर आंदोलन चलाकर क्षेत्र के लिए जिला बनाने की मांग उठाई है। जिला आंदोलन कमेटी के संयोजक एडवोकेट हरि चंद जलमेरिया ने कहा कि बिलावर को जिला बनाने की मांग कई वर्षों से की जा रही है लेकिन सरकार ने आज तक बिलावर को जिले का दर्जा नहीं दिया। साल 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला ने तीन जिले बनाए थे और उस समय भी बिलावर को जिला बनाने के लिए नजरंदाज कर दिया था। साल 2006 में तत्कालीन मुख्यमंत्री गुलाम नबी आजाद की सरकार ने जम्मू कश्मीर में आठ नए जिले बनाए थे उसे समय भी बिलावर को जिले का दर्जा नहीं दिया गया और मौजूदा सरकार बिलावर को जिले का दर्जा देने की मांग को नजरंदाज कर रही है। बिलावर, रामकोट, लोहाई मल्हार, बनी, महानपुर और बसोहली सहित छह तहसीलों वाले इस क्षेत्र को जल्द से जल्द जिला बनाया जाना चाहिए।
बसोहली है सही में पहाड़ी जिला मुख्यालय का हकदार
बसोहली विकास मंच के सदस्य और समय समय पर अलग अलग संस्थाओं के साथ क्षेत्र को जिले का दर्जा देने की वकालत करते रहे शिव कुमार पाधा बताते हैं कि बसोहली कभी डुग्गर राज्यों में सबसे समृद्ध और प्रसिद्ध रियासतों में से एक रही है। 1846 के अमृतसर समझौते के बाद जब महाराजा गुलाब सिंह को जम्मू-कश्मीर का स्वतंत्र शासक मान्यता मिली तब बसोहली अपनी अलग पहचान खोकर जम्मू-कश्मीर राज्य में विलय हो गई। उस समय बसोहली राज्य में लगभग 74 गांव थे जो बाद में बढ़कर 174 गांवों हो गए। 2019 में एडीसी की भेजी व्यवहार्यता रिपोर्ट में भी बसोहली को जिला बनाने की सिफारिश की गई थी। यदि बसोहली को जिला दर्जा दिया जाता है तो यह न केवल प्रशासनिक न्याय और समान विकास सुनिश्चित करेगा बल्कि इसे व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी विकसित करेगा।
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बनी में मुख्यालय बनने से हल होंगे मुद्दे, बिलावर और बसोहली की है बराबर दूरी : डॉ रामेश्वर सिंह

बसोहली और बिलावर के लिए चलते रहे आंदोलन के बीच बनी सब डिवीजन को मुख्यालय बनाने की मांग इस बार तेज हो गई है। विधायक डॉ .रामेश्वर सिंह ने बनी को पर्यटन का केंद्र और सैद्धांतिक रूप से मंजूर नए लखनपुर पुल डोडा नेशनल हाईवे का मुख्य केंद्र बताया है। ऐसे में वकालत की है कि बनी ही सही मायने में जिला मुख्यालय बनाया जाना चाहिए। यहां की भौगोलिक परिस्थिति इसे हिमाचल, चिनाब घाटी के साथ भी जोड़ती है। उन्होंने कहा कि बसोहली और बिलावर विकास के लिहाज से बनी से बेहतर पाते रहे हैं।
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