- 44 करोड़ की परियोजना को सरकार की मिली मंजूरी, नगरी व हीरानगर में भी कवायद जारी
- प्रयुक्त जल प्रबंधन परियोजना के तहत तैयार होने जा रहे एसटीपी और पंपिंग स्टेशन
साहिल खजूरिया
कठुआ। जिले के शहरों और मुख्य कस्बों को दूषित पानी की समस्या से जल्द निजात मिलने जा रही है। दूषित पानी के लिए प्रयुक्त जल प्रबंधन परियोजना (यूज्ड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट) पर काम शुरू होने जा रहा है। हीरानगर और परोल में दस्तावेजी प्रक्रिया शुरू होने के बाद कठुआ और लखनपुर निकाय के लिए परियोजना को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।
दरअसल यह परियोजना स्वच्छ भारत मिशन के दूसरे चरण के तहत चलाई जा रही है। इसमें शहर के निचले जलभराव वाले इलाकों से प्रबंधन के लिए नालों का पानी उठाया जा सकेगा। इसके साथ-साथ विकसित हो रहे नए शिवानगर, पटेलनगर, भरमोरा, रामनगर, ऋषिनगर और अमृत विहार से नालों का पानी कठुआ शहर के बीचोबीच से गुजरती नहर को दूषित नहीं करेगा। निजी स्तर पर गटर की सफाई के बाद खुले में फेंके जा रहे दूषित पानी और मल को भी इस प्लांट में फेंका जा सकेगा।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद के सॉलिड वेस्ट प्रबंधन परियोजना के पास ही प्रयुक्त जल प्रबंधन परियोजना को तैयार करने की योजना है। नगरी, परोल और हीरानगर की निकायों में प्रत्येक में 1.50 एमएलडी क्षमता का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) डिजाइन और निर्माण किया जाएगा। साथ ही इंटरसेप्शन और डायवर्जन स्ट्रक्चर, कन्वेयिंग मेन और इंटरसेप्शन पंपिंग स्टेशन का निर्माण भी किया जाएगा। गली-मोहल्लों से निकलने वाले नालों को जोड़कर नेटवर्क तैयार किया जाएगा जहां से पंपिंग स्टेशन और फिर एसटीपी तक इस्तेमाल दूषित पानी पहुंचाया जाएगा। इसके सफल 12 माह के निशुल्क ट्रायल रन के बाद इसका संचालन और रखरखाव अगले पांच वर्षों तक सुनिश्चित किया जाएगा। नगरी, परोल और हीरानगर के परियोजनाएं लगभग नौ करोड़ की हैं जबकि कठुआ नगर परिषद में लगभग नौ एमएलडी की परियोजना के लिए 44 करोड़ की भारी भरकम राशि खर्च की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना से न केवल नगर समितियों और निकाय में प्रयुक्त जल का वैज्ञानिक प्रबंधन होगा बल्कि गंदे पानी के कारण होने वाले प्रदूषण और बीमारियों पर भी अंकुश लगेगा।
शहर में तैयार होंगे छह इंटीग्रेटेड पंपिंग स्टेशन
अगले कई दशकों तक शहर में आबादी का कचरा संभाल सकने की क्षमता वाली स्वच्छता के लिहाज से इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सीवरेज के शहर में छह बड़े कंपोनेंट होंगे, जिन्हें इंटीग्रेटेड पंपिंग स्टेशन नाम दिया गया है। इसमें पूरे शहर के प्रत्येक घर से निकलने वाला दूषित जल जाएगा। इन छह इंटिग्रेटेड पंपिंग स्टेशनों से मेन पंपिंग स्टेशन तक दूषित जल को भेजा जाएगा, जहां से दूषित जल को प्रस्तावित प्रयुक्त जल प्रबंधन परियोजना में ट्रीटमेंट दिया जाएगा।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जानकारी के अनुसार रामलीला मैदान के विपरीत ड्रीमलैंड पार्क के नजदीक पहला इंटिग्रेटिड पंपिंग स्टेशन होगा। इसके लिए 450 वर्ग मीटर जगह की जरूरत है। दूसरा स्टेशन भरमौरा मिडिल स्कूल के तालाब के नजदीक होगा और इसके लिए 300 वर्ग मीटर जगह की जरूरत है। तीसरा स्टेशन जराई मार्ग 450 वर्ग मीटर क्षेत्र में स्थापित किया जाएगा। चौथा स्टेशन शहीद कैप्टन सुनील चौधरी चौक के विपरीत स्थापित किया जाएगा। पांचवां पंपिंग स्टेशन हंस पंपिंग स्टेशन के नजदीक स्थापित किया जाएगा। पांचवां पंपिंग स्टेशन चनग्रां के नजदीक स्प्रिंग डेल्स स्कूल के पास स्थापित किया जाएगा। इन सभी पंपिंग स्टेशन से दूषित जल को पंप कर मुख्य पंपिंग स्टेशन तक और फिर ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। हालांकि इन इंटीग्रेटेड पंपिंग स्टेशनों को लेकर फिलहाल अधिकारियों की ओर से स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।
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परोल निकाय के प्रयुक्त जल प्रबंधन की योजना डिजाइनिंग चरण में है जबकि हीरानगर निकाय की योजना को लेकर तकनीकी काम किया जा रहा है। कैबिनेट ने कठुआ-लखनपुर की निकायों के लिए 44 करोड़ की परियोजना को मंजूरी दी है। इससे शहर और कस्बों में घर से निकलने वाले दूषित पानी से निजात मिलेगी।
- राजीव कुमार, कार्यकारी अभियंता, यूईईडी विंग
आवासीय और शहरी विकास विभाग