लगभग 14 लाख रुपये खर्च हुए थे, महज तीन महीने में ही निर्माण कार्य की खुल गई पोल
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ/बिलावर। खेल सुविधाओं पर खर्च किए गए लाखों रुपये अब सवालों के घेरे में हैं। विधायकों की ओर से जनसमर्पित सौगातें घटिया गुणवत्ता के चलते चर्चा का विषय बन गई हैं। पहले कठुआ और अब बिलावर में इस तरह के मामले
सामने आए हैं।
सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल धार डूगनु में ग्रामीण विकास विभाग ने नवंबर 2025 में लगभग 14 लाख रुपए खर्च कर वॉलीबॉल कोर्ट बनाया था। लेकिन महज तीन महीने में ही यह कोर्ट उखड़ने लगा है।
स्थानीय लोगों में सुनील कुमार, रमेश चंद, करनैल सिंह और रतन चंद ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से निर्माण कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी की गई। सीमेंट का सही उपयोग नहीं हुआ, और बारिश के तीन दिनों में ही कोर्ट पर की गई कोटिंग भी उखड़ गई। पानी निकासी की कोई व्यवस्था न होने से कोर्ट में पानी भर गया है, जिससे विद्यार्थियों को खेल गतिविधियों का लाभ नहीं मिल पा रहा। इससे पहले कठुआ शहर के पटेलनगर और सावन चक में भी ऐसी ही स्थिति देखने को मिली थी। राष्ट्रीय मानकों का हवाला देकर बनाए गए यह खेल कोर्ट मात्र छलावा बनकर रह गए हैं।
लोगों ने कहा कि सरकार ने युवाओं की प्रतिभा को निखारने के लिए लाखों रुपए खर्च किए, लेकिन घटिया निर्माण के कारण विद्यार्थी खेलों से वंचित हैं। ग्रामीणों ने जिला उपयुक्त कठुआ से मांग की है कि इस मामले की गुणवत्ता जांच करवाई जाए और दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई की जाए।
कोट
मामला संज्ञान में आया है। एक वर्ष के भीतर कोर्ट क्षतिग्रस्त हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी ठेकेदार की है। कोर्ट को ठीक करवाने के निर्देश दिए गए हैं और जल्द ही मरम्मत करवाई जाएगी।
- राज कुमार, ग्रामीण विकास विभाग अधिकारी