- प्रदेश में कहीं नहीं एलपीजी की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। प्रदेश कैबिनेट में मंत्री सकीना इत्तू ने प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे के साथ-साथ वर्तमान सुविधाओं को बेहतर करना सरकार की प्राथमिकता बताया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई जीएमसी में मरीजों की भीड़ को देखते हुए सरकार एक-एक अतिरिक्त अल्ट्रासाउंड मशीन उपलब्ध करवाने की योजना तैयार कर रही है। वैश्विक चुनौतियों के बीच उन्होंने साफ किया कि जम्मू कश्मीर में कहीं भी एलपीजी की किल्लत नहीं है।
कठुआ में प्राइमरी हेल्थ सेंटर खरोट का उद्घाटन करने के बाद मंत्री ने कहा कि जब से नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार बनी है हमने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने की कोशिश की है। मरीजों का सही तरीके से इलाज हो, सही जांच हो और इसके लिए स्वास्थ्य केंद्रों में उपकरण हों। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस ओर 14 महीनों में काफी काम किया है। एमआरअई, कैथ लैब, सिटी स्कैन और डायलिसिस मशीन भी लगाए हैं। बीमार को यह न लगे को निजी अस्पताल ही बेहतर है। निजी से भी बेहतर इलाज सरकारी अस्पतालों में मिले इसका प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि बहुत से इलाकों में स्वास्थ्य संस्थानों को अपग्रेड करने की बात आती है लेकिन पहले हमें डाॅक्टर उपलब्ध करवाने हैं। वर्तमान ढांचों में सुविधाओं को बेहतर करना है और इसके बाद अपग्रेड किया जाएगा। स्वास्थ्य कर्मियों की वेतन को लेकर मांग पर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से कमेटी बनाई गई है रिपोर्ट आएगी तो फैसला लिया जाएगा।
प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सरकार बनने के बाद 12 फीसदी दाखिले बढ़े हैं। स्कूलों में भी जहां पहले बच्चे स्कूल छोड़ रहे थे वहीं अब दाखिले बेहतर हुए हैं। सरकार की ओर से डोर-टू-डोर सरकारी स्कूलाें में दाखिले के लिए कैंपेन करवाई जा रही है। मंत्री ने कहा कि इस साल का विंटर जोन का अब तक का दसवीं और 11वीं का सबसे अच्छा परिणाम रहा है। उम्मीद है कि समर जोन में बेहतरीन परिणाम आएगा। एलपीजी को लेकर पूछे गए सवाल में उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में एलपीजी की कहीं भी कमी नहीं जब होगी तो सरकार उसके लिए बैठी है। उन्होंने ईरान में फंसे प्रदेश के युवाओं को लेकर कहा कि वहां की अंबेसी से लगातार मुख्यमंत्री संपर्क में हैं। बच्चों को सुरक्षित जगह रखा गया है।
डॉक्टरों के एप्रन पहनने को लेकर मंत्री ने कहा कि डंडा लेकर डॉक्टरों को एप्रन नहीं पहनाया जा सकता है। सफेद कोट एक डॉक्टर की निशानी है, इससे मरीजों को डॉक्टर और आम लोगों के बीच का फर्क पता चलता है। डॉक्टर भी इस बात को समझेंगे।