कठुआ। बसोहली उपमंडल के गांव सनन घाट में श्री शिव महापुराण कथा के चौथे दिन का आयोजन शिव मंदिर में किया गया। कथा का वाचन राम दास जी महाराज ने किया। कथा प्रसंग में बताया गया कि त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम सीता हरण से व्याकुल होकर उनकी खोज कर रहे थे, तब भगवान शंकर उन्हें देखकर आनंदित हुए और मन ही मन जयकार करने लगे। माता सती को यह विश्वास नहीं हुआ कि श्रीराम परमात्मा हैं। बार‑बार समझाने के बावजूद जब सती का भ्रम दूर नहीं हुआ तो शिवजी ने उन्हें परीक्षा लेने की अनुमति दी।
सती ने सीता का रूप धारण कर श्रीराम के सामने जाकर परीक्षा ली। श्रीराम ने सती को पहचान लिया और उन्हें प्रणाम कर शिवजी का समाचार पूछा। सती लज्जित होकर लौट आईं और शिवजी से असत्य कहा। शिवजी ने ध्यान में सती के सीता रूप को देख लिया और अत्यंत दुखी होकर पत्नी रूप में सती का परित्याग करने का संकल्प लिया।
कथा में आगे सती के शरीर त्याग, पार्वती जी के रूप में पुनर्जन्म, पार्वती जी की तपस्या, कामदेव द्वारा शिव का ध्यान भंग, कामदेव का भस्म होना और अंततः शिव‑पार्वती विवाह तक का प्रसंग सुनाया गया। श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण कर भक्ति भाव से जयकारे लगाए और शिव‑पार्वती विवाह प्रसंग पर उल्लास व्यक्त किया।