कठुआ। जम्मू‑कश्मीर ट्रेड प्रमोशन ऑर्गेनाइजेशन (जेकेटीपीओ) ने विश्व बैंक समर्थित आरएएमपी, रेजिंग एंड एसलरेटिंग एमएसएमई परफार्मेंस कार्यक्रम के अंतर्गत जिला‑स्तरीय डिजिटल फाइनेंसिंग जागरूकता अभियान की शुरुआत कठुआ से की। इससे पहले 14 फरवरी को आयोजित यूटी‑स्तरीय डिजिटल फाइनेंसिंग एमएसएमई कार्यशाला के सफल समापन के बाद यह जिला‑स्तरीय पहल शुरू की गई है।
इस अभियान का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच दिलाना और उन्हें वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों व तकनीक आधारित समाधान के बारे में जानकारी प्रदान करना है। कठुआ में आयोजित पहले जिला‑स्तरीय कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों से आए 50 से अधिक एमएसएमई ने भाग लिया। कार्यक्रम में उद्यमियों को डिजिटल एकीकरण, औपचारिक ऋण चैनलों तक पहुंच और फिनटेक आधारित वित्तीय मॉडल की जानकारी दी गई।
जेकेटीपीओ के प्रबंध निदेशक सुदर्शन कुमार ने कहा कि डिजिटल फाइनेंसिंग एमएसएमई क्रेडिट इकोसिस्टम में संरचनात्मक बदलाव का प्रतीक है। संगठन का लक्ष्य जम्मू‑कश्मीर में एक डिजिटल रूप से सशक्त एमएसएमई परिदृश्य तैयार करना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जेकेटीपीओ वित्तीय संस्थानों और उद्यमियों के बीच अंतिम छोर तक संपर्क सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उद्घाटन भाषण में जेकेटीपीओ के फैकल्टी विशाल ने वित्तीय साक्षरता और डिजिटल अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि वैकल्पिक क्रेडिट मॉडल और फिनटेक प्लेटफॉर्म एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने उद्यमियों को प्रोत्साहित किया कि वे वित्तीय संस्थानों से सक्रिय रूप से जुड़ें और डिजिटल वित्तीय उपकरणों का लाभ उठाएं। कार्यक्रम में भाग लेने वाले एनबीएफसी, एमएफआई और फिनटेक कंपनियों के प्रतिनिधियों ने अपने ऋण उत्पादों, माइक्रोफाइनेंस मॉडल, डिजिटल लोन प्रोसेसिंग सिस्टम और लचीले पुनर्भुगतान विकल्पों पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैसे डिजिटल ऑनबोर्डिंग और डोरस्टेप क्रेडिट असेसमेंट मॉडल के माध्यम से एमएसएमई समय पर और बिना अधिक जमानत के वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
इस पहल से जम्मू‑कश्मीर के एमएसएमई को बेहतर ऋण सुविधा, डिजिटल ऑटोमेशन, भुगतान प्रणाली में सुधार, परिचालन लागत में कमी और फिनटेक आधारित नवाचारपूर्ण वित्तीय उत्पादों का लाभ मिलेगा। जेकेटीपीओ ने आश्वासन दिया कि यह अभियान अन्य जिलों में भी जारी रहेगा ताकि उद्यमियों तक समावेशी, तकनीक‑सक्षम और अंतिम छोर तक वित्तीय पहुंच सुनिश्चित की जा सके।