- परिवार के लिए दो वक्त की रोटी कमाने निकला था रमेश
- सात सदस्यों के परिवार में इकलौता कमाने वाला था, बदनोता में मातम का माहौल
बिलावर। सुकराला से मछेडी सड़क पर सफर करना जोखिम भरा होता जा रहा है। पिछले एक साल में हुए सड़क हादसों ने कई जिंदगियां लील ली। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे और तारकोल नहीं होने के कारण राहगीरों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
मछेडी सड़क पर सुचार जंगल के पास बुधवार को हुए हादसे में बदनोता निवासी रमेश कुमार की मौत के बाद गांव में मातम छा गया है। मृतक पेशे से मजदूर था और बुधवार को परिवार के लिए दो वक्त की रोटी कमाने के सिलसिले में घर से निकला था लेकिन हादसे में उसकी जान चली गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि रमेश कुमार ही परिवार का सहारा था और मजदूरी करके पत्नी, चार बेटे और दो बेटियों सहित सात सदस्यों का पालन-पोषण करता था। बुधवार दोपहर कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया। शाम करीब 5:00 बजे जब शव गांव पहुंचा तो परिजन और ग्रामीणों का रो-रो कर बुरा हाल था।
गांव में गमगीन माहौल है और लोग सरकार से सड़क की मरम्मत करने की मांग कर रहे हैं। सुकराला से मछेडी तक 24 किलोमीटर लंबी सड़क पर वर्ष 2021 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत तारकोल बिछाया गया था। इसके बाद से अब तक सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। पानी की निकासी की व्यवस्था न होने के कारण सड़क जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है और गड्ढों में तब्दील हो गई है। इस पर चलना खतरे से खाली नहीं है और आए दिन हादसे हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों संदीप कुमार, प्रवीण सिंह, अरुण और हंसराज ने बताया कि उन्होंने कई बार विभाग से सड़क की मरम्मत और तारकोल बिछाने की मांग की लेकिन सरकार ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। लोगों का कहना है कि सरकार विकास के बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन पहाड़ी इलाकों को जोड़ने वाली इस सड़क की सुध नहीं ली गई।
कोट
सड़क की मरम्मत और तारकोल बिछाने के लिए लगभग 80 लाख रुपये का एस्टीमेट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेजा गया है। राशि जारी होते ही काम शुरू कर दिया जाएगा।
- जमीर हुसैन, अधिशाषी अभियंता पीएमजीएसवाई