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Kathua News: सीमा के हालात बदले, अब गोलाबारी थमने के बाद लोग चाहते हैं विकास

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हीरानगर (लडवाल बॉर्डर से लाइव)। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के हालिया दौरे ने सीमावर्ती इलाकों के लोगों में नई उम्मीदें जगाई हैं। सीमा पर हालात बदलने और गोलाबारी थमने के बाद लोग अब विकास के इंतजार में हैं।
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जीरो लाइन पर बसे गांवों के निवासियों ने अपनी समस्याओं और अपेक्षाओं को सामने रखते हुए कहा कि सरकारें लगातार काम कर रही हैं, लेकिन अभी भी कई बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पाई हैं। हालांकि गृहमंत्री लोगों से नहीं मिले लेकिन सीमावर्ती इलाके में उनके पिछले दस महीने में दूसरे दौरे से लोगों को आने वाले समय में हालात और बेहतर होने की उम्मीद जग गई है।
लडवाल गांव गुरनाम बार्डर आउट पोस्ट से सटा है। बिल्कुल जीरो लाइन पर है। आधा दशक पहले तक यहां हालात बिल्कुल अलग थे। कब पाकिस्तान गोलाबारी कर दे, कुछ कहा नहीं जा सकता था। ऐसे में लोगों के लिए अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना यहां रुकना मजबूरी था। दिवाली से लेकर करवाचौथ के त्यौहारों, फसल पकने से लेकर फसल की कटाई में बारूद की गंध घुली रहती थी। बार्डर के इन गांव की दीवारों को कई बार पाकिस्तानी चौकियों से अकारण हुई गोलाबारी ने छलनी किया लेकिन लोगों के हौसले बुलंद रहे। आज लोग मानते हैं कि हालात सामान्य है और अब सरकार को विकास की एक नई दिशा सीमावर्ती ग्रामीणों के लिए भी तय करनी होगी ताकि वे भी दुनिया की मुख्यधारा का हिस्सा बनें।
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उद्योग और रोजगार की उम्मीद

लडवाल गांव के निवासी सुरेंद्र कुमार ने कहा कि उनका गांव जीरो लाइन पर स्थित है। अच्छा लगा कि गृहमंत्री ने साल में दूसरी बार दौरा किया है। विकास कार्य हुए हैं और आगे भी होने की उम्मीद है, लेकिन सीमावर्ती लोगों को अभी भी बहुत कुछ चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले फायरिंग होने पर छोटे-छोटे बच्चों को लेकर रोजाना पलायन करना पड़ता था, अब बंकर बन गए हैं जिससे राहत मिली है। सुरेंद्र कुमार ने जोर देकर कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में उद्योग स्थापित होने चाहिएं और रोजगार के साधन मिलने चाहिए ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित हो सके।


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किसानों की जमीन और ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं भी मिलें


स्थानीय निवासी प्रीतम दास ने गृहमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले डेढ़ दशक में विकास काफी हुआ है लेकिन सीमावर्ती किसानों की जमीनें तारबंदी के पार हैं, जिससे उन्हें खेती में कठिनाई होती है। काफी जमीन बंजर पड़ी है। उन्होंने मांग की कि तारबंदी को बिल्कुल सीमा पर लगाया जाए ताकि किसान अपनी जमीन का सही उपयोग कर सकें। साथ ही उन्होंने कहा कि जीरो लाइन के बच्चों को भर्ती में अलग से कोटा मिलना चाहिए। स्वास्थ्य सुविधाओं पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि इलाज के लिए दस किलोमीटर दूर जाना पड़ता है और वहां भी केवल डिस्पेंसरी जैसी सुविधा मिलती है। उन्होंने मांग की कि सीमा के पास बेहतर स्वास्थ्य ढांचा विकसित किया जाए
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शिक्षा ढांचे की कमी हो पूरी

युवा शुभम शर्मा ने कहा कि उनके गांव में शिक्षा ढांचा बेहद कमजोर है। बेहतर संस्थान बीस किलोमीटर दूर हैं, जिससे सीमावर्ती युवाओं को प्रतिस्पर्धा में पीछे रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षण संस्थान सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित किए जाएं और जीरो लाइन के बच्चों को भर्ती में विशेष कोटा दिया जाए। शुभम ने बताया कि पहले गोलाबारी के कारण पलायन करना पड़ता था, लेकिन अब हालात बेहतर हुए हैं और ग्रामीणों को राहत मिली है।


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सरकार ने वादों को निभाया अब और संसाधनों पर भी होगा काम
डीडीसी सदस्य मढीन कर्ण अत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने सीमा के हालात पूरी तरह बदल दिए हैं। अब यहां रोजाना गोलाबारी नहीं होती और माहौल शांत है। बंकर बनाकर दिए गए हैं और विकास कार्य हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की और भी जरूरतें हैं, जिनमें विशेष भर्ती कोटा, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अधिक संसाधन शामिल हैं। अत्री ने कहा कि सीमा प्रहरियों के साथ सीमा के लोग भी यहां के प्रहरी हैं और सरकार ने पिछले 11 साल में बहुत कुछ दिया है। गृहमंत्री के दौरे के बाद हालात और भी बेहतर होंगे, ऐसी उम्मीद सीमा के लोगों को है।
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